हाल ही में जब इसराइल अपने सबसे बुरे सांप्रदायिक दंगों से जूझ रहा था तब किसी ने उम्मीद नहीं की थी कि यहां कुछ ही दिनों में एक अनोखी राष्ट्रीय एकता की सरकार का गठन हो सकता है, जिसमें हर सोच की पार्टियाँ- दक्षिणपंथी, मध्यमार्गी और वामपंथी- तो शामिल होंगी ही, साथ ही साथ एक महत्वपूर्ण अरब पार्टी भी इसमें अहम भूमिका निभाएगी.
यह इसराइल के लिए एक ऐतिहासिक मौक़ा है जो कि 1948 में उसके निर्माण के बाद से लेकर अब तक अकल्पनीय था.
राजनीतिक अस्थिरता से गुज़र रहे इसराइल में इसकी संभावनाएं कुछ समय से नज़र आ रही थीं मगर हाल के तनाव के कारण इसमें अड़चन पैदा हो गई थी. ऐसा महसूस होने लगा था कि ये सपना ही बनकर रह जाएगा.
अगर यह सरकार बनती है और इसराइली संसद की इसे मंज़ूरी मिलती है तो यह सामुदायिक स्तर पर बुरी तरह से विभाजित इस क्षेत्र के लिए निश्चित तौर पर बहुत अहम पहल और प्रयोग साबित होगा.