ताहिर हुसैन हाशमी
ईद उल फित्र का त्योहार माहे रमज़ान में पूरे रोज़े रखने और इबादतों को अंजाम देने वालों के लिए है।वैसे भी ईद उन्हीं की है जो रमज़ान के पूरे रोज़े रखें और इबादत को अंजाम देते हैं।वह चाहे पुरुष हों,महिलाएं हो या फिर छोटी उम्र के लड़के।यहां हम बात कर रहे हैं।पुराने लखनऊ के मंसूर नगर निवासी ऐसे ही एक 11वर्षीय छोटे बालक अमन अब्बास की।उम्र में तो वह काफी छोटा है।मगर हौसले उसके काफ़ी बड़े हैं।अमन ने इस बार रमज़ान में पूरे 31 रोज़े रखें हैं।यानिकि रमज़ानुल मुबारक के रोज़ों से एक रोज़ा ज़्यादा।
क्योंकि इस बार रमज़ान का महीना पूरे 30 रोज़ों का गुज़रा है।
अमन ने बताया कि उसने एक दिन पहले से ही रोज़ा रखा था।इस सम्बंध में अमन के पिता चाँद मियां ने बताया कि अमन की रोज़ा कुशाई पिछले साल की गई थी।तब इसने पूरे 23 रोज़े रखे थे।अमन को धार्मिक जानकारी भी है।रमज़ानुल मुबारक से सम्बंधित उससे जो भी सवाल किए उसके उसने बिल्कुल सही सही जवाब दिए। अमन के पिता एम्ब्रॉयडरी का काम करते हैं।अमन के परिवार में माता पिता के अलावा चार बहनें है।जोकि अपनी पढ़ाई कर रही हैं।अमन कश्मीरी मोहल्ला के अंगूरी बाग़ स्थिति लखनऊ ओरिएंटल स्कूल के दिव्तीय कक्षा का छात्र है।अमन ने बताया कि उसको पढ़ाई का बहुत शौक़ है।वह बड़ा होकर डॉक्टर बनना चाहता है।डॉक्टर बन कर अमन अपने परिवार के अलावा समाज की सेवा भी करना चाहता है।