Home / मोहम्मद साहब को बुरा कहकर, कहीं हम भगवान विष्णु को तो नहीं नकार रहें, और अपने ही धर्म से ही बाहर हुए जा रहें हो:लेखक एस.एन.लाल

मोहम्मद साहब को बुरा कहकर, कहीं हम भगवान विष्णु को तो नहीं नकार रहें, और अपने ही धर्म से ही बाहर हुए जा रहें हो:लेखक एस.एन.लाल

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नरसिंहनन्द सरस्वती जिसने मोहम्मद साहब पर बेहुदा टिप्पणी की है…, जोकि उसकी अज्ञानता का परिचय कराती है। नरसिंहनन्द सरस्वती जैसा की नाम से पता चल रहा पुरुष-स्त्री का संगम , वैसे ही इसके व्यक्तित्व में भी स्त्री-पुरुष का मेल है, तभी ये ऐसी बातें कर सकता है किसी धर्म के विरोध में। रामचरित्र मानस को दोहा के अुनसार ‘‘जाकी रही भावना जैसी प्रभु मूरत देखी तिन तैसी’’ (जिसकी जैसी भावना उसी के अनुरूप प्रभु को उसी रूप में देखा)। तो नरसिंह सरस्वती भावना ही ग़ल्त है तो इसको प्रभू भी….! ये अपने ही धर्म पर कलंक है। नरसिंहनन्द बेहूदा टिप्पणी करते समय ये कैसे भूल गया कि कहीं मोहम्मद साहब वही कल्कि अवतार न हो, जिनके बारे भगवान विष्णु ने भविष्यवाणी की थी।
एस.एन.लाल
भारतीय संस्कृत विद्वान वेद प्रकाश उपाध्याय के अनुसार ः (1) कल्कि का नाम नराशंस होगा, जिसका अर्थ है मानव की प्रशंसा, मुहम्मद नाम का अर्थ भी मनुष्य की प्रशंसा करता है। (2) कल्कि का जन्म मधु महीने के 12 वें दिन, हिंदू चंद्र वर्ष के पहले महीने में, मुहम्मद साहब इसी तरह अरबी लूनर वर्ष के पहले महीने रबीउल अव्वल पर 12 वें दिन पैदा हुए। (3) कल्कि का जन्म शंभुला गाँव में हुआ है, जिसका अर्थ है खजूर के पेड़ों से भरी जमीन, मक्का, मुहम्मद साहब का जन्म स्थान है जो खजूर के पेड़ों से भरा हुआ है। (4) कल्कि के पिता और माता का नाम विष्र्ुियश और सुमति होगा, जिसका अर्थ है भगवान और शांतिपूरर््ि महिला। मुहम्मद साहब के पिता और माता का नाम अब्दुल्ला और आमना है, जिसका अर्थ भगवान और शांतिपूरर््ि महिला का दास भी है।
किताबों के अनुुसार अवतार का जन्म या तो हो चुका है लगभग 1000 वर्ष पूर्ण या वह आने वाला है। और मोहम्मद के वंश से भी ‘मेंहदी’ नाम का पुत्र आने वाला है। अब यह वही कल्कि अवतार मोहम्मद साहब के रुप में जन्म ले भी चुका है या मेंहदी के रुप मे भी आ भी सकता है, हो सकता न यह कल्कि अवतार न भी हो।
एस.एन.लाल
एक कथानुसार एक व्यक्ति ने ऋषि से पूछा ‘क्या परमात्मा है..मै कैसे मान लू…, हो सकता है न भी हो’ ऋषि ने कहां सही कहां…‘‘वह सामने एक गुफा है…हमारे गुरुओं ने बाताया था उसमें एक शेर का वास है, लेकिन किसी ने देखा नहीं…, तुम उसमें देख आओं’’ । तो वह व्यक्ति बोला कि ‘‘कहीं शेर हुआ…तो वह मुझे खा जायेगा’’। ऋषि का बस यहीं समझों…अगर परमात्मा हुआ तो संसार में किये गये बुरे कार्याे का दण्ड परमात्मा देगा ही…नहीं हुआ तो कोई बात नहीं, लेकिन बाद में सोचने या फैसला बदले का अवसर नहीं मिल जायेगा…इसलिए फैसला इसी जीवन में करो…तो तुम भी कल्कि अवतार समझो या न समझों, लेकिन जो फैसला हो इसी जीवन में कर लो, फिर मौक़ा न मिलेगा…नरक में जाने से कोई रोक न पायेगा। जैसे यही हाल करोना के समय है…कोरोना से बचने को जो कोई जो दवा बाताता है वह हम लेने लगते है…चाहे उससे द्वारा बचे या न बचे…लेकिन कहीं ये यक़ीन ज़रुर रहता है कि शायद इससे जीवन बच जाये…., बस यहीं हाल परमात्मा या दूसरे धर्म के अवतारों के मानने का है…।
एस.एन.लाल
स्वामी लक्ष्मी शंकर आचार्य जी कहते है मैने क़ुरआन को पढ़ा परन्तु सही समझ न पाया, लेकिन जब मोहम्मद साहब का जीवन परिचय पढ़ा और उसके साथ क़ुरआन को समझा…तब क़ुरआन और मोहम्मद साहब दोनो समझ में आये…, मोहम्मद साहब ने महिलाओं का आदर करने महिलाओं सुरक्षा प्रबन्ध करनें, पीड़ितों की सहायता और परमात्मा एक ही है यह बताने पूरा जीवन निकाल दिया। युद्ध केवल वहां पर ही मोहम्मद साहब द्वारा किया गया, जहां मोहम्मद साहब को इन नेक कार्यो से रोका गया। मोहम्मद साहब द्वारा 10 वर्षो में आत्मरक्षा में किये गये युद्धों में कुल 1000 आदमी ही मारें गये, दोनो ओर की सेनाओ के मरने वाले लोगों को मिलाकर। जबकि इतिहास में मिलता है…किसी भी एक धर्म युद्धों में ही 1000 अधिक लोग मार दिये जाते थे।
एस.एन.लाल
मै समझता हॅूं ऐ अज्ञानी नरसिंहनन्द की बेहूदा बातों से लोगो को दूर रहना चाहिए और सरकार को उसकी इस ओछी हरकत पर उचित कार्यवाही करना चाहिए।
एस.एन.लाल

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