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खामेनई शहीद: ट्रंप-नेटन्याहू को सौंप दो, जंग रुकेगी—लखनऊ के असीम विकार की ईरान को ऐतिहासिक अपील, दुनिया सिहर उठी!”

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शाबू ज़ैदी के कलम से
ईरान पर आतंकवादी इस्राइल और अमेरिका द्वारा किए गए मिसाइल हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह सैयद अली खामेनई शहीद हुए। इसकी याद में आज लखनऊ के छोटे इमामबाड़े में ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के सेक्रेटरी मौलाना यासूब अब्बास ने एक मजलिस का आयोजन एवं खिताब किया। मस्जिद से पहले इस सभा को डॉ. सारंग शाही टीले वाली मस्जिद के इमाम मौलाना फजलुर रहमान मनन, उत्तर प्रदेश कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष अजय राय, पूर्व विधायक सपा रेहान नईम, और डॉक्टर अब्दुल मजीद इलाही ने संबोधित किया। दिवंगत आयतुल्लाह शहीद सैयद अली खामेनई के प्रतिनिधि और अपने ज्ञान के भाषणों एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया डिबेट में अच्छे वक्ताओं के छक्के छुड़ा देने वाले लखनऊ की शान असीम विकार ने भी संबोधन दिया। असीम विकार ने सरकार, ईरान सरकार और वर्तमान सुप्रीम लीडर से इस मंच के माध्यम से अपील की है। जहां ईरान ने जंग रोकने के लिए पांच शर्तें रखी हैं, उसमें एक शर्त बढ़ाने का आग्रह किया है कि हम जंग रोक देंगे, बस ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री नितन्याहू को हमें सौंप दो।
इसके बाद मस्जिद को संबोधित करते हुए मौलाना यासूब अब्बास ने कुरान की आयत नंबर ‘कुल्लु नफ्सिन ज़ाइकतुल मौत’ का उल्लेख किया—हर जिंदगी को मौत का स्वाद चखना है। यह बात हर धार्मिक पुस्तक से साबित है। जो जिंदा है, उसे मरना है, लेकिन आपकी मौत धर्म पर हो रही है या अधर्म पर? उन्होंने कहा कि आयतुल्लाह की इस शहादत से पूरी दुनिया में दो तरीके के लोग सामने आए हैं। एक वे जो मानवता, इंसानियत और अधर्म के खिलाफ खड़े हैं। दूसरे वे जो धार्मिक लोगों का नरसंहार कर रहे हैं। उनकी जमात बहुत छोटी है। ऐसे लोगों के खिलाफ आज अमेरिका और इजराइल में जनता सड़कों पर निकल आई है। वह अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप और इजराइल के प्रधानमंत्री से उनका नाम लिखकर इस्तीफा की मांग कर रही है। साथ ही, दुनिया में अलग-अलग पड़े ये दोनों देश आज मजबूर हो रहे हैं पीछे हटने के लिए। इसका श्रेय ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह सैयद अली खामेनई को जाता है, जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी इंसानियत, मानवता और अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने में बिताई।
इस मजलिस के समापन के बाद मौलाना यासूब अब्बास ने मुख्य अतिथि डॉक्टर मजीद हकीम इलाही को ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड की जानिब से एक पत्र दिया। इसमें आग्रह किया गया कि हार्मुज से भारतीय जहाज को निकालने में ईरान सरकार इजाजत दे और कोई बाधा न बनाए। हमारे देश की जनता हमेशा से ईरान और ईरान की जनता के समर्थन में रही है।

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