Home / अन्य राज्य / हिजाब की आन, बिजनेस की बलि: हजारीबाग की मुस्लिम बहनों ने 1 लाख का ऑर्डर ठुकरायाहजारीबाग,

हिजाब की आन, बिजनेस की बलि: हजारीबाग की मुस्लिम बहनों ने 1 लाख का ऑर्डर ठुकरायाहजारीबाग,

हिजाब की आन, बिजनेस की बलि: हजारीबाग की मुस्लिम बहनों ने 1 लाख का ऑर्डर ठुकरायाहजारीबाग,

झारखंड (12 मार्च 2026): झारखंड के हजारीबाग जिले में एक प्रेरणादायक घटना ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है। स्थानीय मुस्लिम बहनों ने अपनी धार्मिक आस्था और हिजाब के सम्मान को सर्वोपरि रखते हुए 1 लाख रुपये के भारी-भरकम मेहंदी ऑर्डर को सिरे से ठुकरा दिया। यह वाकया एक शादी समारोह के दौरान घटा, जहां इन बहनों की साहसिकता ने सभी को प्रभावित कर दिया।मामला एक शादी हॉल से जुड़ा है, जहां इन मुस्लिम लड़कियों को 50 मेहमानों के लिए मेहंदी लगाने का ऑर्डर मिला था। प्रत्येक व्यक्ति के लिए 2,000 रुपये की फीस तय थी, जो कुल मिलाकर 1 लाख रुपये का व्यवसाय होता। लड़कियां उत्साहित होकर शादी हॉल पहुंचीं, लेकिन वहां एक बुजुर्ग व्यक्ति ने उनसे हिजाब उतारने की शर्त रख दी। उसने साफ कहा, “मुझे इस हिजाब से दिक्कत है। अगर मेहंदी लगानी है तो हिजाब हटाना पड़ेगा।”इस मांग पर लड़कियों ने कोई पलक झपकाए बिना इनकार कर दिया। उन्होंने न केवल हिजाब उतारने से साफ मना किया, बल्कि पूरे ऑर्डर को रद्द करने का फैसला ले लिया। पैसे की लालच में अपनी आस्था से समझौता करने के बजाय, इन्होंने हिजाब को प्राथमिकता दी और मौके से खिसक लीं। सोशल मीडिया पर इस घटना का वीडियो वायरल हो गया है, जिसमें लोग इन बहनों को “साहसी” और “आदर्श” बता रहे हैं।स्थानीय लोगों का कहना है कि यह घटना महिलाओं के सशक्तिकरण और धार्मिक स्वतंत्रता का प्रतीक है। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया, “ये लड़कियां मेहंदी आर्टिस्ट हैं और अपना छोटा व्यवसाय चला रही हैं। इतने बड़े ऑर्डर को ठुकराना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने अपनी पहचान नहीं बेची।” इस वाकये ने हिजाब जैसे मुद्दे पर फिर से बहस छेड़ दी है, जहां एक ओर धार्मिक अधिकारों की बात हो रही है, तो दूसरी ओर सामाजिक रूढ़ियों पर सवाल उठ रहे हैं।इन बहनों की इस कुर्बानी को सलाम करते हुए सोशल मीडिया यूजर्स ने #HijabZindabad जैसे हैशटैग ट्रेंड कराए हैं। हजारीबाग पुलिस ने अभी तक इस मामले में कोई शिकायत दर्ज न होने की पुष्टि की है, लेकिन घटना ने स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना लिया है। क्या ऐसी घटनाएं धार्मिक स्वतंत्रता को मजबूत करेंगी या विवाद बढ़ाएंगी? समय ही बताएगा।

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