Home / अंतरराष्ट्रीय / ईरान का सनसनीखेज ऐलान: अमेरिका-इजरायल राजदूतों को निकालने वाले देशों को होरमुज जलडमरू में खुली छूट

ईरान का सनसनीखेज ऐलान: अमेरिका-इजरायल राजदूतों को निकालने वाले देशों को होरमुज जलडमरू में खुली छूट

Spread the love

हरान, 11 मार्च 2026 (तेहरान टाइम्स के हवाले से): ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने एक अभूतपूर्व बयान जारी करते हुए कहा है कि जो भी अरब या यूरोपीय देश अपने यहां से अमेरिका और इजरायल के राजदूतों को निष्कासित करेगा, उसे कल (12 मार्च 2026) से होरमुज जलडमरू (Strait of Hormuz) से गुजरने की पूरी आजादी और अधिकार दिया जाएगा। यह घोषणा वैश्विक ऊर्जा बाजार और भू-राजनीतिक समीकरणों को हिला देने वाली है, क्योंकि होरमुज जलडमरू दुनिया के 20-30% पेट्रोलियम तेल और एक-तिहाई LNG (तरल प्राकृतिक गैस) के पारगमन का प्रमुख मार्ग है।IRGC का आधिकारिक बयान और शर्तेंIRGC के वरिष्ठ कमांडरों ने तेहरान टाइम्स को दिए विशेष बयान में स्पष्ट किया कि यह प्रस्ताव “रणनीतिक साझेदारी” का हिस्सा है। मुख्य बिंदु:शर्त: अमेरिका और इजरायल के राजदूतों का तत्काल निष्कासन (expulsion)।लाभ: होरमुज स्ट्रेट में IRGC की नौसेना द्वारा “ग्रीन चैनल” प्रदान किया जाएगा, यानी कोई जांच, टोल या बाधा नहीं।समयसीमा: कल सुबह 6 बजे (ईरानी समय) से प्रभावी, जो भी देश पहले कदम उठाएगा।
IRGC प्रवक्ता ने चेतावनी दी कि अमेरिकी नौसैनिक पोतों या इजरायल समर्थक जहाजों पर “कठोर कार्रवाई” जारी रहेगी, लेकिन सहयोगी देशों को “भाईचारे” का दर्जा मिलेगा।होरमुज जलडमरू: वैश्विक ऊर्जा का गलाहोरमुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ने वाला 39 किमी चौड़ा संकीर्ण मार्ग है:आंकड़े: प्रतिदिन 21 मिलियन बैरल तेल (सऊदी, UAE, इराक, कुवैत से) गुजरता है।रणनीतिक महत्व: ईरान इसके उत्तरी तट पर नियंत्रण रखता है; IRGC के पास मिसाइलें, स्पीडबोट्स और माइंस तैनात।पिछले हादसे: 2019 में ईरानी ड्रोन हमले और टैंकर जब्ती से तेल कीमतें 20% उछली थीं।
ईरान अब इसे “राजनयिक हथियार” बना रहा है, ताकि अमेरिकी प्रतिबंधों (जैसे तेल निर्यात पर) का जवाब दिया जाए।भू-राजनीतिक संदर्भ और संभावित प्रभावयह ऐलान मध्य-पूर्व संकट के बीच आया है:पृष्ठभूमि: इजरायल-हमास युद्ध, हूती हमले (लाल सागर) और अमेरिकी नौसैनिक तैनाती (USS Abraham Lincoln) के जवाब में।लक्षित देश: सऊदी अरब, UAE (अब्राहम समझौते के बाद इजरायल के करीब), यूरोपीय देश (जैसे जर्मनी, फ्रांस) जो तेहरान पर दबाव डाल रहे।वैश्विक प्रतिक्रिया: अमेरिका ने “खोखला दावा” करार दिया; सऊदी ने चुप्पी साधी। भारत (जो ईरान से तेल आयात करता है) स्थिति पर नजर रख रहा।आर्थिक जोखिम: यदि IRGC स्ट्रेट ब्लॉक करे, तो तेल $150/बैरल तक पहुंच सकता है, भारत में पेट्रोल ₹150+ हो सकता है।ईरान की रणनीति: दबाव का नया औजारईरान लंबे समय से होरमुज को “हमारा गेम” कहता रहा है। यह कदम:अमेरिकी “मैक्सिमम प्रेशर” नीति (ट्रंप प्रशासन 2.0) का जवाब।अरब देशों को इजरायल के खिलाफ लामबंद करने की कोशिश।BRICS+ (ईरान सदस्य) के जरिए चीन-रूस समर्थन की उम्मीद।
विश्लेषकों का मानना है कि यह “ब्लफ” हो सकता है, लेकिन IRGC की क्षमता (2025 में 100+ ड्रोन हमले) इसे गंभीर बनाती है।भारत के लिए निहितार्थभारत, जो 80% तेल आयात पर निर्भर है, के लिए खतरा:रूस-ईरान तेल सस्ता लेकिन असुरक्षित।नौसेना (INS Vikrant) को हिंद महासागर में सतर्क रहना होगा।
सरकार ने विदेश मंत्रालय के जरिए “शांति” की अपील की है।यह घटना मध्य-पूर्व तनाव को नई ऊंचाई दे सकती है। तेहरान टाइम्स के अनुसार, IRGC प्रमुख ने कहा, “हमारा जल हमारा नियम।” वैश्विक बाजार आज सुबह से हिल चुका

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *