“नई दिल्ली, 10 मार्च 2026: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत महिलाओं के अधिकारों के कथित उल्लंघन को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए देश में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने का पुरजोर समर्थन किया। �कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणियाँजस्टिस जॉयमलया बागची की अगुवाई वाली बेंच ने कहा, “अब समान नागरिक संहिता लागू करने का वक्त आ गया है।” �
कोर्ट ने जोर दिया कि पर्सनल लॉ को सीधे अमान्य घोषित करने से कानूनी शून्यता पैदा होगी, इसलिए इसे विधायिका के विवेक पर छोड़ना बेहतर होगा ताकि संसद UCC संबंधी कानून बना सके। �याचिका का विवरणयाचिका में मुस्लिम महिलाओं के विरासत, तलाक, बहुविवाह और रखरखाव जैसे मुद्दों पर पर्सनल लॉ के उल्लंघन का दावा किया गया। �
सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 44 का हवाला देते हुए नोट किया कि राज्य को सभी नागरिकों के लिए समान कानून सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। �संदर्भ और प्रभावयह टिप्पणी गोवा (जो पहले से UCC लागू है) और उत्तराखंड (2024 में UCC कानून) के बाद आती है। �
कोर्ट ने केंद्र सरकार से UCC पर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है, जिससे देशव्यापी बहस तेज हो गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने की वकालत की:





