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देश और धर्म से प्रेम एक ही बात है आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत

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आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने हाल ही में नागपुर में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए देश और धर्म के प्रति अपने विचार व्यक्त किए। उनके अनुसार, देश और धर्म से प्रेम एक ही बात है, लेकिन अक्सर लोग इन्हें अलग-अलग मानते हैं। आइए उनके बयान के कुछ मुख्य बिंदुओं पर नजर डालते हैं:

– *धर्म और अध्यात्म का महत्व*: भागवत ने कहा कि भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए धर्म और अध्यात्म में आगे बढ़ना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आर्थिक समृद्धि के साथ-साथ आध्यात्मिक विकास भी जरूरी है।

– *देश और समाज के प्रति सेवा*: आरएसएस प्रमुख ने कहा कि सेवा का काम दया भाव से नहीं, बल्कि प्रेम भाव से करना चाहिए। उन्होंने स्वयंसेवकों की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि वे समाज के लिए काम करते हैं और बदले में कुछ नहीं चाहते.

– *हिंदू समाज की एकता*: भागवत ने हिंदू समाज को एकजुट होने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सभी पर्व हिंदू समाज मिलकर मनाए और अपनी दुर्बल जातियों के लिए मिलकर काम करें ¹ ² ³।

– *राष्ट्र निर्माण में योगदान*: आरएसएस प्रमुख ने कहा कि भारत के उदय से दुनिया को रास्ता मिलेगा। उन्होंने विविधता को महत्व देते हुए कहा कि भारत के प्राचीन ऋषियों ने विश्व को एक बताया था ⁴।

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