मोहन भागवत ने कहा है कि 75 साल की उम्र में रिटायरमेंट की बात नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उम्र के इस पड़ाव पर भी लोगों को सक्रिय रहना चाहिए और समाज के लिए काम करना चाहिए। भागवत ने कहा कि उम्र बढ़ने के साथ-साथ अनुभव और ज्ञान भी बढ़ता है, जिसका उपयोग समाज के लिए किया जा सकता है।
*मोहन भागवत के बयान के मुख्य बिंदु:*
– *75 साल की उम्र में रिटायरमेंट नहीं*: भागवत ने कहा कि उम्र के इस पड़ाव पर भी लोगों को सक्रिय रहना चाहिए।
– *समाज के लिए काम*: उन्होंने कहा कि लोगों को समाज के लिए काम करना चाहिए और अपने अनुभव और ज्ञान का उपयोग करना चाहिए।
– *अनुभव और ज्ञान*: भागवत ने कहा कि उम्र बढ़ने के साथ-साथ अनुभव और ज्ञान भी बढ़ता है, जिसका उपयोग समाज के लिए किया जा सकता है [1]।
*मोहन भागवत के बयान का महत्व:*
– *समाज के लिए योगदान*: भागवत के बयान से लोगों को समाज के लिए योगदान करने के लिए प्रेरित किया जा सकता है।
– *सक्रिय रहने की आवश्यकता*: उन्होंने लोगों को सक्रिय रहने और अपने अनुभव और ज्ञान का उपयोग करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।




