स्विट्जरलैंड ने भारत को दिया गया ‘सबसे पसंदीदा देश’ यानी FFN का दर्जा रद्द कर दिया है, जिससे भारतीय कंपनियों को स्विट्जरलैंड में अधिक टैक्स चुकाना होगा। यह निर्णय 1 जनवरी, 2025 से लागू होगा और इसका मतलब है कि स्विट्जरलैंड भारतीय कंपनियों के लाभांश पर 10 फीसदी टैक्स लगाएगा।
इस निर्णय के पीछे का कारण नेस्ले से संबंधित एक मामले में भारत के सुप्रीम कोर्ट का फैसला है, जिसमें आय पर करों के संबंध में दोहरे कराधान से बचने के लिए स्विट्जरलैंड और भारत के बीच हुए द्विपक्षीय समझौते में FFN खंड का प्रावधान निलंबित करने की एकतरफा घोषणा की गई है।
टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि स्विट्जरलैंड के इस कदम से भारत में ‘निवेश प्रभावित’ हो सकता है क्योंकि लाभांश पर अधिक विदहोल्डिंग टैक्स लगेगा। इसके अलावा, यह निर्णय इस साल मार्च में हस्ताक्षरित एक व्यापार समझौते के तहत चार देशों—आइसलैंड, लिकटेंस्टाइन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड के अंतर सरकारी समूह के यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) की ओर से 15 साल की अवधि में भारत में 100 अरब डॉलर का निवेश खटाई में पड़ सकता है। ¹





