बीते कल के ही के दिन यानी 26 नवम्बर 1938 को स्वतंत्रता सेनानी #मौलाना_शौक़त_अली की वफ़ात दिल्ली में हुई थी ।
शौक़त अली रामपुर में पैदा हुए मौलान मोहम्मद जौहर अली के बड़े भाई थे। उनकी तालीम अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में हुई वह अपने यूनिवर्सिटी क्रिकेट टीम के कप्तान थे। सिविल सर्विस का एग्जाम पास कर के 1896 to 1913 तक अवध और अगरा प्रान्त में ऑफिसर रहे।
गांधी जी से प्रेरित होकर 1913 में नोकरी छोड़कर दी और स्वतंत्रता आन्दोलन में शामिल हो गए। शौकत अली ने अपने भाई मौलाना मुहम्मद अली जौहर की उर्दू साप्ताहिक पत्रिका हमदर्द और अंग्रेजी साप्ताहिक कॉमरेड प्रकाशित करने में मदद की। 1919 में उन्हें अंग्रेजों के ख़िलाफ़ लिखने के जुर्म में जेल में बंद डाल दिया गया।
उन्हें खिलाफत आंदोलन के अंतिम अध्यक्ष के रूप में चुना गया था। असहयोग आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के लिए अपने समर्थन (1919-1922) के लिए उन्हें फिर से गिरफ्तार कर लिया गया था और 1921-1923 तक जेल में बंद रहे। मार्च 1922 में, वह राजकोट जेल में थे 1923 में उन्हें रिहा किया गया।
26 नवंबर 1938 में दिल्ली के करोल बाग़ में उनका इंतेक़ाल हो गया 28 नवम्बर 1938 को उन्हें दिल्ली जामा मस्ज़िद के क़रीब मीना बाज़ार की शौकत अली मस्ज़िद में दफन किया गया।





