सहारनपुर मस्जिद विवाद में हाईकोर्ट की रोक से नया मोड़, ₹6.41 करोड़ की वसूली पर अंतरिम रोक:
सहारनपुर। कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को लेकर चल रहे विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट के ताजा रुख से मामले ने नया मोड़ ले लिया है। हाईकोर्ट ने मस्जिद से जुड़े मामले में ₹6.41 करोड़ की वसूली पर अंतरिम रोक लगाते हुए सरकार से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी।
मामला उस मस्जिद से जुड़ा है जिसे प्रशासन ने सरकारी जमीन पर कथित अनधिकृत कब्जा मानते हुए हटाने का आदेश दिया था। नगर मजिस्ट्रेट ने 16 जुलाई को 30 दिनों में परिसर खाली करने का आदेश देते हुए ₹6.41 करोड़ से अधिक की क्षतिपूर्ति भी तय की थी। मस्जिद कमेटी ने इस आदेश को चुनौती दी, लेकिन 2 सितंबर को जिला अदालत ने अपील खारिज कर दी। इसके तीन दिन बाद 5 सितंबर को प्रशासन ने मस्जिद को ध्वस्त कर दिया।
मस्जिद पक्ष का दावा रहा है कि यह इमारत लंबे समय से मौजूद थी और इसे करीब 100 से 150 वर्ष पुराना बताया गया। पक्ष की ओर से 1911 का बिजली बिल भी अदालत में दस्तावेज के रूप में पेश किया गया था, हालांकि इस दस्तावेज की प्रामाणिकता और उस समय सहारनपुर में बिजली व्यवस्था होने को लेकर अदालत में सवाल उठे।
मस्जिद कमेटी ने ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जिला अदालत का फैसला आने के बाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला। हालांकि, यह कहना कि हर ऐसे मामले में कानूनन अनिवार्य रूप से 15 दिन की मोहलत देनी ही होती है, सही नहीं होगा; इस मामले में मूल बेदखली आदेश में 30 दिन की अवधि का उल्लेख था और उसके खिलाफ अपील भी दाखिल की गई थी।
मस्जिद गिराए जाने के बाद इसके मलबे के नीचे करीब 20 फीट गहरी और 1.5 मीटर चौड़ी पुरानी कुएं जैसी संरचना मिलने से भी मामला चर्चा में आ गया है। प्रशासन ने इसके ऐतिहासिक महत्व की जांच के लिए पुरातत्व विशेषज्ञों की मदद लेने की बात कही है।
ध्वस्तीकरण को लेकर मुस्लिम संगठनों, विपक्षी नेताओं और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने भी सवाल उठाए हैं। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद समेत कई नेताओं ने कार्रवाई की आलोचना की, जबकि प्रशासन का कहना है कि उसने अदालत के आदेश और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की। अब हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई से यह स्पष्ट होगा कि ₹6.41 करोड़ की वसूली और मूल आदेश के संबंध में आगे क्या कानूनी स्थिति बनती है।
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