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विजयदशमी पर शस्त्र पूजा विधि विधान से की जाती है।

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  असत्य पर सत्य की विजय का संदेश देने वाले विजयदशमी पर परंपरा का निर्वाह करते हुए शुक्रवार 15 अक्टूबर को डालीगंज के प्रतिष्ठित मनकामेश्वर मठ मंदिर परिसर में शस्त्रों की पूजा की गई। मठ मंदिर की श्रीमहंत देव्यागिरि ने विशेषतौर से मंदिर में संग्रहित पूर्व महंतों के द्वारा कुंभ से लाए गए सिद्ध अस्त्रों का अभिषेक पूजन किया। नारी सशक्तिकरण अभियान के तहत मठ मंदिर परिसर में वीरांगनाओं ने आत्मरक्षा के लिए मार्शल आर्ट का प्रदर्शन भी किया।



  साल 1933 से मनकामेश्वर मठ नाम से लोकप्रिय इस प्राचीन मठ मंदिर में महंत रामगिरि, महंत बालक गिरि, महंत त्रिगुणानंद गिरि, महंत बजरंग गिरि, महंत केशव गिरि महराज के बाद वर्तमान में श्रीहमहंत देव्यागिरि, साल 2009 से गद्दी पर आसीन हैं। मठ मंदिर की परंपरा के अनुसार विजयदशमी पर शस्त्र पूजा विधि विधान से की जाती है। उसी परंपरा के तहत शुक्रवार को मंदिर परिसर में महंत त्रिगुणानंद के समय का सिद्ध त्रिशूल और महंत बालक गिरि के काल के सिद्ध फरसे का पूजन विधि विधान से मंत्रों के साथ किया गया। श्रीमंहत देव्यागिरि ने बताया कि मान्यता के अनुसार महंत रामगिरी बाबा के सोटे का स्पर्श पाकर शिवलिंग से दूध की धारा निकल पड़ी थी। आज भी वह सोटा मंदिर में सुरक्षित है। उसका भी पूजन इस अवसर पर किया गया। इसके साथ ही बल्लभ, तलवार, धनुष-बाण, चिमटा, तोमर, मुग्दर, शूल, कुल्हाड़ी, बकुली, भाला, कुंटा का भी पूजन किया गया। श्रीमहंत देव्यागिरि ने प्रथम देव गणपति, महादेव, शक्ति और भगवान राम का पूजन करने के बाद शस्त्र पूजन में आधुनिक आग्नेयास्त्र जैसे बंदूक और रिवाल्वर का भी पूजन किया। उन्होंने कहा कि शक्ति कभी अस्त्रों में नहीं होती अस्त्र-शस्त्र केवल मददगार साबित हो सकते हैं आवश्यकता तन और मन को व्रज बनाने की अधिक है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में हर उत्सव का प्रकृति से गहरा सम्बंध भी होता है। इसी तरह विजयदशमी का भी सम्बंध प्रकृति से है। विजयदशमी पर खासतौर से शमी का पूजन किया जाता है। नेत्र और पेट आदि के रोगों का शमन करने वाले इस आयुर्वेदिक महत्व के पौधे के संदर्भ में कहा जाता है कि लंका पर विजयी पाने के बाद श्रीराम ने शमी पूजन किया था। नवरात्र में भी मां दुर्गा का पूजन शमी वृक्ष के पत्तों से करने का विधान है। शनिदेव के पूजन में भी इनका प्रयोग होता है।



  इस क्रम में महिला सशक्तिकरण का संदेश देते हुए मठ मंदिर की वीरांगनाओं ने आत्मरक्षा के हुनर को दर्शाया। इसमें उन्होंने तलवारबाजी और मार्शल आर्ट का प्रदर्शन किया। कल्याणी गिरी ने मार्शल आर्ट का प्रदर्शन कर तन और मन की शक्ति के तालमेल को प्रभावी रूप से दर्शा कर प्रशंसा हासिल की। इसमें गति, संतुलन और हुनर का संगम देखते ही बना। इस अवसर पर महिला संत ऋतुजा गिरि, गौरजा गिरि, सहित उपमा पाण्डेय, अंशु उपस्थित रहे।

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