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ये सोच के माँ बाप की ख़िदमत में लगा हूँ,इस पेड़ का साया मिरे बच्चों को मिलेगा

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माता-पिता के साथ बिताए हुए दिन ही अच्छे दिन हैं,
हमारे दिल के बहुत क़रीब हमारे मित्र क़म्बर रज़ा,मिंटू ने मुझसे पूछा,अच्छे दिन क्या होते है,
मेरे झट से मुंह से निकल गया,
शायद किसी शक्ति ने मेरे मुंह में ऐसे शब्द डाल दिये,कि बाल अवस्था में माता-पिता द्वारा पालन पोषण करना, ईश्वर ने दो फरिश्ते ऐसे दिए हैं,एक फरिश्ता बाप के रूप में जो दिन भर मेहनत मज़दूरी कर के परिवार व खास अपने बच्चे पुत्र-पुत्री के लिए अच्छे से अच्छा सुविधा के पैसे कमाना है,जिसके लिए वो खून पसीना एक कर देता है,
माता के रूप में वो फरिश्ता जिसके पेट में रहकर हम उसका खाना खा लेते थे, जिसका दूध पीकर हम बड़े हुए, और उस फरिश्ते माता को इसमें बहुत खुशी-आनंद मिलता है,हम धीरे-धीरे जैसे-जैसे बड़े होने लगे, उसकी खुशी और बढ़ती गई, मां मे वो विशेषता है कि अपने बच्चों के चेहरे को देखकर परेशान या भूखा है पहचान लेती है,हमारे पालन पोषण में हमारे माता-पिता कब बुढ़ापे को पहुंचजाते हैं, उनको ये भी नहीं मालूम होता है,और जिसके फरिश्ते के रूप में माता-पिता दुनिया से चले गए,बस उसके अच्छे दिन खत्म हो गए, दुनिया में सब कुछ कमा लेने के बाद भी हम उनकी कमी नहीं पूरी कर सकते वो अच्छे दिन कभी नहीं वापस ला सकते, जिनके पास उनकी माता-पिता या उसमें से एक भी है वह उनका बहुत ख्याल रखें ताकि अच्छे दिन क़ायम रहे,🙏

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