न्यूयॉर्क में हाल ही में सैकड़ों लोगों ने फिलिस्तीन के समर्थन में एक रैली आयोजित की, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने पोस्टर और नारों के माध्यम से फिलिस्तीन की आजादी और उनके अधिकारों की मांग की। यह रैली गाजा में जारी युद्ध और इजरायली कार्रवाइयों के खिलाफ वैश्विक स्तर पर बढ़ते असंतोष का हिस्सा थी।
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 79वें सत्र में फिलिस्तीन को विशेषाधिकार प्राप्त हुए, जिसके तहत फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास को 25 सितंबर 2025 को वीडियो संदेश के जरिए संबोधन की अनुमति दी गई। भारत ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया, जो दो-राज्य समाधान और फिलिस्तीन के आत्मनिर्णय के अधिकार को मजबूत करता है। अमेरिका और इजरायल ने इस प्रस्ताव का विरोध किया, लेकिन 142 देशों ने इसके पक्ष में मतदान किया। भारत ने लगातार फिलिस्तीन के साथ राजनयिक संबंध बनाए रखे और शांतिपूर्ण समाधान की वकालत की है
इसी बीच, न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ सहित कई मुस्लिम देशों के नेताओं ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ बैठक की। इस बैठक में गाजा युद्ध को समाप्त करने और क्षेत्रीय शांति स्थापित करने पर चर्चा हुई। ट्रंप ने हमास को युद्धविराम प्रस्तावों को अस्वीकार करने के लिए जिम्मेदार ठहराया, जबकि अरब नेता गाजा में दीर्घकालिक स्थिरता और फिलिस्तीनी प्राधिकरण को प्रशासन सौंपने की संभावनाओं पर स्पष्टता चाहते हैं। सऊदी अरब, कतर, मिस्र, और अन्य देशों के नेताओं ने इस चर्चा में हिस्सा लिया, जिसमें युद्धविराम और मानवीय सहायता जैसे मुद्दों पर जोर दिया गया।
ये घटनाएं दर्शाती हैं कि गाजा और फिलिस्तीन के समर्थन में वैश्विक स्तर पर जन-आंदोलन और कूटनीतिक प्रयास तेज हो रहे हैं। प्रदर्शनकारी और नेता एक स्वतंत्र, संप्रभु फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना और गाजा में मानवीय संकट के समाधान की मांग कर रहे हैं।





