कल शाम राजधानी लखनऊ के बड़े इमामबाड़े मे पाकिस्तान के मशहूरो मारूफ़ मौलाना शहेंशाह हुसैन नक़वी ने मजलिस को ख़िताब फरमाया , उनकी इल्मी मजलिस सुनने के लिए लखनऊ व हिंदुस्तान के अनेकों शहरों से उनको सुनने क़सीर तादात में लोग पहुंचे, इमामबाड़ा के इत्तिहास में वहां इतनी पब्लिक कभी नहीं जमा हुई,
मौलाना शहेंशाह साहब ने जब इल्मी मजलिस पढ़ना शुरू की तो वहां मोमिनो की सलवात व शोर से काफी लोगों को फ़ज़ाएल सुनने में दुश्वरी हुई,
बेशक मौलाना शहेंशाह साहब को अल्लाह ने बेशुमार इल्म अता किया ,
उस इल्म की रौशनी से कुछ हासिल करने जिससे अपने अमाल मे सुधार के लिए लोग वहां जमा हुए,ये बात सब जानते हैं कि मौलाना शहेंशाह नकवी साहब, मुशतहिद मौलाना मरहूम सैयद अली नक़ी नक़वी (नक़्क़न साहब) के इल्म की बेशुमार तारीफ करते-करते नहीं थकते,अक्सर मजलिसो में सुना है वो मरहूम नक़न साहब को अपना उस्ताद मानते हैं,
नक़्क़न साहब का जो हाल लखनऊ वालों ने किया,
वो किसी से छुपा नहीं है,
मैंने अपने बुजुर्गों से सुना है कि उनके इंतेक़ाल के वक्त हमारे क़ौमी भाइयों ने मिठाई बाटी और खुशी मनाई थी, इस बेशर्मी के काम पर वे लोग भी चुप थे,
जो उनके द्वारा लिखी गई किताब शहीद ए इंसानियत को पढ़ने के बाद अपनी सहमति के तौर पर उस किताब पर हस्ताक्षर किए थे , उन्होंने न तो उस किताब की सफाई पेश की और न ही मरहूम नक़्क़न साहब द्वारा माफी मांगने पर उनको माफ करने की अपील की,
लोग कहते हैं कि उस दौर के लोग अगर कर्बला में मौजूद होते तो, जनाबे हुर को माफ न करते, जबकि इमाम हुसैन हुर से कह रहे है, मैंने माफ किया और मेरे रब ने माफ किया,
पर अफसोस लखनऊ के लोगों ने नक़्क़न साहब को माफ नहीं किया,
बेशक चुप रहने वाले और ज़ियात्ती करने वाले दोनों गुनहगार हैं शायद उस वक्त के ज्यादातर लोग दुनिया से रुख़सत हो चुके,और अपना हिसाब अपने रब को दे रहे होंगे,
अल्लाह यही दिखाना चाहता है
देखो कल जिस आलिम को तुमने हर तरीके से परेशान किया,
आज उसी के शगिर्द की इल्मी मजलिस सुनने के लिए लखनऊ में इतिहास रच दिया बेशक अल्लाह ईमान वालों के दर्जे बुलंद करने वाला है,
और ज़ालिमों को रुसवा करने वाला है,
शब्बीर हुसैन
638890320




