मौलाना तौफ़ीक़ रज़ा iMC अध्यक्ष सलाम
शाबू ज़ैदी
7617032786
इत्तेहाद-ए-मिल्लत कौन्सिल के अध्यक्ष तौफीक़ राज़ा साहब आपका एक पाखंडी बाबा जो खुद अपनी पूरी जिंदगी भोले भाले लोगों से दान लेकर व्यापित करता हो जिसको बक़रीद के बकरे को हलाल करके उसका गोश्त गरीबों में बांटने के बारे में न मालूम हो उसका जवाब देने से ज्यादा जरूरी है,कि क़ौम की बेरोजगारी,गरीबी,भुखमरी, शिक्षा मुहैया कराने के लिए.चिंतन करना चाहिए,
हाल ही में अपने सोशल मीडिया के माध्यम से देखा होगा कि महाराष्ट्र में शायद वो मुस्लिम महिला को गरीबों को बट रहे खाने की लाइन से महज़ इस वजह से ख़ाना नहीं दिया जाता है,
क्योंकि उसने जय श्री राम नहीं बोला,
इसका जिम्मेदार मैं उन लोगों को नहीं मानता जो गरीबों.की भूख मे धर्म जाति देखते हैं,
इसका जिम्मेदार हम और आप लोग हैं जो मुंह से तो ईमान पर है,
लेकिन ज़कात देने में उनका दम निकलता है,
जो लोग ज़कात अदा भी करते हैं,
उनकी ज़कात ज़रूरतमंदों तक नहीं पहुंचती,
वरना एक महिला को खाने की लाइन में लगने की आवश्यकता नहीं होती, अगर ज़कात एक जगह जमा हो रही होती तो हर मस्जिद,इमामबाड़ा,दरगाह में लंगर चल रहे होते,
अगर ज़कात एक जगह जमा हो रही होती तो महंगी शिक्षा को हासिल करने में बच्चे असमर्थ न होते,
अगर जकात एक जगह ज़मा हो रही होती तो हमारे अस्पताल होते जहां ग़रीबों का फ्री में हर तरीके का इलाज हो रहा होता,
अगर जकात एक जगह जमा हुई होती तो ग़रीबों को जिंदगी जाड़ा गर्मी और बरसात मे.सड़कों,फुटपाथ, टूटे मकान मे न गुज़रना पड़ती है,
चलिए जो हुआ वो कल हुआ,
आज के लिए आप जैसे लोगों को जो राजनीतिक मुद्दे पर बोलते हैं,
उनको अपने साथ हम सोच लोगों को लेकर खड़ा होना चाहिए और जकात को एक जगह जमा किया जाए, जिसको जिम्मेदारी के साथ हकदारों तक पहुंचा दिया जाए,
ताकि क़ौम की बदहाली को दुरुस्त किया जाए,
हम सबको याद रखना चाहिए हम सबको एक दिन मरना है और उस रब्बुल इज्जत के सामने अपने आमाल लेकर हाजिर होना,तब हमसे सवाल होगा बताओ अपनी जिंदगी के अलावा तुमने इंसानियत के लिए कौन-कौन सी जिम्मेदारियां उठाई
,शायद हम लोग कोई जवाब न दे पाए,, उसके बाद आप सब हमसे बेहतर जानते हैं





