थाईलैंड में आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय मूल के तमिल (आईओटी) समुदाय के नेताओं के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की, जो बेहद सफल रही। इस बैठक में दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा हुई। भारतीय मूल के तमिल समुदाय ने पिछले 200 से अधिक वर्षों से भारत और श्रीलंका के बीच एक जीवंत सेतु की भूमिका निभाई है, जो दोनों देशों की साझा विरासत और सहयोग का प्रतीक है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर भारतीय मूल के तमिल समुदाय के कल्याण और विकास के लिए कई बड़ी घोषणाएं कीं। भारत सरकार, श्रीलंका सरकार के साथ मिलकर इस समुदाय के लिए व्यापक विकास परियोजनाओं को समर्थन देगी। इनमें 10,000 घरों का निर्माण शामिल है, जो समुदाय के लोगों को बेहतर आवास सुविधा प्रदान करेगा। इसके अलावा, स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने के लिए नई स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थापना की जाएगी।
इन परियोजनाओं में धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के स्थानों का भी ध्यान रखा गया है। पवित्र सीता एलिया मंदिर के विकास के लिए विशेष सहायता दी जाएगी, जो इस समुदाय की आस्था और परंपराओं का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। इसके साथ ही, अन्य सामुदायिक विकास परियोजनाओं को भी बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि इस समुदाय का जीवन स्तर ऊंचा उठ सके और उनकी जरूरतों को पूरा किया जा सके।
यह बैठक और घोषणाएं भारत और श्रीलंका के बीच सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का संकेत देती हैं। भारतीय मूल के तमिल समुदाय के नेताओं ने इन पहलों का स्वागत किया और इसे दोनों देशों के रिश्तों में एक नया अध्याय बताया। यह कदम न केवल समुदाय के विकास में मदद करेगा, बल्कि भारत की उस प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है, जो विदेशों में बसे भारतीय मूल के लोगों के प्रति हमेशा से रही है।
भारत और श्रीलंका के बीच मजबूत संबंध: भारतीय मूल के तमिल समुदाय के लिए बड़ी घोषणाएं




