सुप्रीम कोर्ट ने प्रयागराज डेवलपमेंट अथॉरिटी (PDA) द्वारा 2021 में छह लोगों के घरों को अवैध रूप से तोड़े जाने के मामले में सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने इस कार्रवाई को “अमानवीय” और “अवैध” करार देते हुए कहा कि यह संविधान के अनुच्छेद 21 (आवास का अधिकार) का उल्लंघन है ¹।
कोर्ट ने निम्नलिखित आदेश दिए:
– *मुआवजा*: प्रयागराज डेवलपमेंट अथॉरिटी को प्रभावित छह लोगों को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया गया, जो छह सप्ताह के भीतर देना होगा।
– *पुनर्निर्माण का विकल्प*: पहले कोर्ट ने पीड़ितों को यह विकल्प दिया था कि वे अपने घर पुनर्निर्माण कर सकते हैं, बशर्ते वे अपील दायर करें और असफल होने पर खुद दोबारा तोड़ने की जिम्मेदारी लें। हालांकि, पीड़ितों ने संसाधनों की कमी का हवाला देते हुए मुआवजे की मांग की थी।
– *प्रक्रिया का पालन*: कोर्ट ने भविष्य में विध्वंस से पहले 2024 के अपने फैसले में निर्धारित दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करने का आदेश दिया, जिसमें नोटिस की उचित सेवा और अपील का समय देना शामिल है।



