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बिहार में शकरकंद

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#शकरकंद
बिहार में शकरकंद को अलुवा भी बोलते हैं आलू से मिलता जुलता होता है पर यह मीठा होता है इसके पत्ते का उपयोग सांग के रूप में भी किया जाता है। शकरकंद को फल की श्रेणी में रखा गया है पूजा पाठ और उपवास में भी लोग इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। अगर इस धूप में सुख दिया जाए और आग में पका कर खाया जाए तो इसका टेस्ट कई गुना ज्यादा बढ़ जाता है।मीठे स्वाद वाले शकरकंद सर्दियों में उगाए और खाए जाते हैं। ये स्टार्च से भरपूर जड़ वाली एक सब्ज़ी है जो दुनियाभर में पाई जाती है। लोग इसे बड़े चाव से कई तरह से खाने में इस्तेमाल करते हैं। इसे उबालकर, आग में भूनकर और हलवा बना कर भी खाया जाता है। इसके अलावा स्वीट पोटैटो चिप्स और फ्राइज़ लोगों को खूब भाते हैं जबकि कई लोग तो इसे सलाद की तरह कच्चा भी खा लेते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि स्वादिष्ट होने के साथ ही इसके कई फ़ायदे भी हैं? आइए जानते हैं शकरकंद हमारे लिए कितना फ़ायदेमंद होता है। शकरकंद कार्ब्स का एक बेहतरीन स्रोत है क्योंकि इसमें करीब 41.4 ग्राम कार्ब्स पाया जाता है। इसमें मौजूद कार्बोहाइड्रेट उर्जा देने के साथ ही हमारे वज़न को बढ़ने नहीं देता।इसके अलावा शकरकंद में 4 ग्राम प्रोटीन, 6.6 ग्राम फाइबर और केवल 0.3 ग्राम फैट्स होता है।साथ ही ये हमारे अंदर मौजूद स्ट्रेस हॉरमोन कॉर्टीसोल को भी कम करता है जिससे हमारा तनाव कम होता है।कई रिसर्च द्वारा ये भी पता चला है कि इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट कुछ तरह के कैंसर से हमें बचाते हैं।इसमें दो तरह के फाइबर होते हैं जिसे हम पचा नहीं सकते इसलिए ये हमारे पाचन तंत्र के अंदर रहता है और हमारी आंतों से जुड़ी कई चीज़ों के लाभकारी होता है। आंतों का सेहतमंद होना मतलब अच्छा पाचन तंत्र होता है।शकरकंद में बीटा कैरोटीन भी पाया जाता है जो हमारे शरीर के अंदर विटामिन ए में बदल जाता है और हमारी आंखों के लिए फ़ायदेमंद होता है।ये हमारे शरीर में अच्छे कोलेस्ट्रॉल यानि HDL के लेवल को बढ़ाता है और बुरे कोलेस्ट्रॉल यानि LDL को कम करने में भी मदद करता है।
अनूपशहर

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