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बांग्लादेश का आजादी से लेकर अब तक का संघर्ष

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1971 में बना बांग्लादेश जिसे 1975 में सेना ने तख्ता पलट कर जर्नल इरशाद के मार्शल ला दिया । गरीबी ओर प्राकृतिक आपदाओं का दंश झेलता ये मुल्क जिसने वास्तव में 1991मे सैन्य शासन खत्म होने के बाद अपने पैरों पर चलना शुरु किया ।

शुरुआती राजनीतिक उठा पटक के बाद कुछ स्थिरता आई तो वहां के लोगों ने अपनी मेहनत ओर योग्यता से इस बाढ़ ग्रस्त देश को एक विकासशील देश की केटेगरी में लाकर खड़ा कर दिया । वरना वहां जूट ओर चावल के सिवा क्या था ? उसे भी बाढ़ चट कर जाती थी ।

करीब 17 करोड़ की आबादी वाला ये छोटा सा देश जो क्षेत्थफल की दृष्टी से दुनिया में 91 वे नंबर पर आता है । यहां पोपुलेशन डेंसिटी बहुत ज्यादा है ।‌ इसके बावजूद ये 60 बिलियन डालर से ज्यादा का एक्सपोर्ट करते हैं । होजरी गारमेंट्स इंडस्ट्री में ये चाइना के बाद दुनिया में दूसरे नंबर पर आते हैं । आज जीडीपी में ये पाकिस्तान से काफी आगे है । जबकि उस टाइम पाकिस्तान काफी आगे थे ।

इसके अलावा ये फार्मास्युटिकल आई टी में भी इनकी काफी अच्छी पर्फार्मेंस है । यहां के हेकर बहुत सी जगह अपनी सेवाएं देते हैं । यहां की मेन पावर गल्फ के अलावा ओर बहुत से कंट्रीज में जाती है । जबकि हजारों की संख्या में भारतीय बांग्लादेश में नोकरी ओर व्यवसाय करते हैं ।

आज ये देश एक हसीना की बकलोदी के कारण जल रहा है । 1971 में मुक्ती वाहिनी में लड़े लोगों के परिवार वालो को वहां सरकारी नोकरियों में 30 % आरक्षण है जबकि वहां टोटल आरक्षण 50% के करीब है ।

अपने इस उप महाद्वीप में सरकारी नोकरियों का एक चार्म रहा है । बांग्लादेश में भी सरकारी नोकरी वाले की इमेज रहती है । जिस युवक की वहां सरकारी नोकरी हो उसको सुंदर शुशील ओर गृह कार्य दक्ष कन्या से फोरन विवाह हो जाता है । जैसे अपने यहां हो जाता है , ऐसे ही वहां लड़कियो में है वो भी नोकरी लगते ही बढ़िया हेंडसम लड़का ढूंढ़ लेती है ।

क्यूंकि वहां भी सरकारी नोकरी में पैसा ओर फेसेलिटीज काफी ज्यादा है । बाकी प्राइवेट में तो लो कोस्ट कटिंग से ही वो अपना मुकाम बनाए हैं ,वहा सस्ता श्रम टको में मिल जाता है । आप बांग्लादेश की पुलिस देख लीजिए ओर पाकिस्तान की देख लीजिए इसी से अंतर समझ आ जाएगा ।

यहां का लिटरेसी रेट 75% से ज्यादा है । इसलिए वहां भी पढ़ें लिखे बेरोजगार युवाओं की संख्या सवा करोड़ के करीब पहुंच गई है । यूवा वर्ग वहां सभी तरह का आरक्षण खत्म करने की मांग कर रहा था । वहां काफी दिनों से छात्र यूनियनो के प्रदर्शन चल रहे थे ।

ऐसे में हसीना को राष्ट्र के नाम संदेश देना था । ये 30% आरक्षण वालों में शेख हसीना के कोर वोटर ओर कार्यकर्ता आते हैं । इसलिए वो इसे खत्म करने के मूड में नहीं है । विपक्ष को लगभग ये निबटा चुकी है कुछ जेल में हैं कुछ साइड लगा दिए । ये चुनाव भी ये फुल धांधली से जीती है सबको पता है ।

क्यूंकि संगत इसकी भी खराब है लफंडर टाइप लोगों से इसके ज्यादा विचार मिलते हैं इसलिए मंच से आंदोलन कर रहे लोगों को ये रजाकारो का वंशज बोल बैठी । बस यही से बात बिगड़ गई, वहां रजाकार उन्हें बोला जाता है जो 1971 में पाकिस्तानी सेना से मिले हुए लोग थे ओर अपनों की मुखबिरी करते थे । इसलिए कोई भी आम बांग्लादेशी रजाकार शब्द को पसंद नहीं करता ।

अब हालत ये है कि आरक्षण सपोर्ट वाले ओर विरोध वाले आमने सामने आ चुके हैं । तीन दिन से नेट बंद है कालेज केम्पस में हमले हो रहे हैं । ढाका विश्वविद्यालय का होस्टल अखाड़ा बना पड़ा है । बहुत से भारतीय छात्र जिनमें मेडिकल स्टूडेंट काफी है वो वापस आ रहे हैं । टिकट मंहगे हो रखे हैं ।

वहां mbbs सस्ता ओर अच्छा है इसलिए काफी भारतीय स्टूडेंट भी वहां जाते हैं । अभी कल ही एक दोस्त के बेटे का टिकट करवाया है 28 हजार में ढाका टू दिल्ली हुआ है । ये एयरलाइंस वाले भी ससुरे आपदा में अवसर ढूड ही लेते हैं ।

लगभग पूरे मुल्क में कर्फ्यू लगाना पड़ गया । पुलिस से बात नहीं बनी तो सेना उतारनी पड़ी । लेकिन यहां सेना में एक ट्विस्ट आ चुका है वहां सेकेंड ओर थर्ड लेवल के फोजी आफिसर ओर जवानों ने अपने देश के लोगों पर गोली चलाने से इंकार कर दिया है । उन्होंने कहा हम इस मुल्क ओर आवाम की हिफाजत के लिए है हम लोगो पर किसी राजनेतिक दुर्भावना में गोली नहीं चलाएंगे । हम किसी राजनीतिक पार्टी के आधीन नहीं है । जो उसका हुक्म मानेगे हम इस मुल्क के लिए है ।

अब यहां हसीना फंस गई , सेना के आफिसर्स की ओर से एक लेटर अल जजीरा चेनल के इंग्लैंड स्थित स्टूडियो को पहुंचा है जिसमें उन्होंने सब डिटेल से लिखा है । अल जजीरा ने इस न्यूज़ को चला दिया तब से हसीना बोराई हुई घूम रही है …

अब देखिए क्या होता है हसीना टिकेगी या जाएगी ? मुझे लगता है वो कुर्सी इतनी आसानी से तो नहीं छोड़ेगी लेकिन जन आंदोलन ऐसा है कहीं ठिकाने न लग जाए ..

.कुछ मित्र लोग बांग्लादेश के हालातो पर लिखने को कह रहे थे इसलिए शुभ प्रभात में ही जाग कर लिखना पड़ा पड़ा कुछ थोड़ा आगे पीछे हो गया हो तो एडजस्ट कर लेना ..शब्दों में क्या रखा है ? भावनाओं को समझो . 🤔

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