Home / पूंजीपतियों के लिए 14 गांवों के हजारों आदिवासियों को जल-जंगल-जमीन से बेदखल कर रही गुजरात सरकार।

पूंजीपतियों के लिए 14 गांवों के हजारों आदिवासियों को जल-जंगल-जमीन से बेदखल कर रही गुजरात सरकार।

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02/6/2020

जनज्वार। गुजरात में नर्मदा जिले में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के आसपास की केवड़िया कॉलोनी विस्तार में विकास के नाम पर 14 गांव को जबरन खाली करा बाड़ लगाने पहुंची सरकारी टीमों और पुलिस वालों का आदिवासी समुदाय के लोगों ने विरोध किया। इस विरोध के चलते लगभग 100 आदिवासी नेताओं और आंदोलनकारियों को पुलिस ने शनिवार 30 मई को अपनी हिरासत में ले लिया। इनमें कांग्रेस के 8 विधायक शामिल हैं। आदिवासी राज्य सरकार द्वारा यहां बाड़ लगाए जाने का विरोध कर रहे हैं।

इस मामले में जनज्वार ने विधायक अनंत पटेल से बात की तो उन्होंने बताया कि आदिवासी समन्वय मंच और अन्य स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से आदिवासियों की जमीन छीनने के विरोध में जन आंदोलन खड़ा हुआ है। सरकार के निर्णय का विरोध करने पर नर्मदा जिले में और अन्य कई आदिवासी विधायकों को पुलिस ने धर दबोचा है, इनमें अनिल जोशियारा, पीडी वासव, चंद्रिकाबेन बारिया, पुनाभाई गमित, अमरसिंह भाई चौधरी, आनंद पटेल जैसे कई नेताओं को गिरफ्तार किया गया है। इस पूरी मुहिम के चलते नर्मदा जिले को भी सील कर दिया गया है, ताकि आंदोलनकारियों की मदद के लिए नर्मदा जिले तक कोई न पहुंच पाए और उनकी खबर भी जनता तक न पहुंच पाए।

यह गतिविधियां पिछले कई दिनों से चल रही हैं और आदिवासियों को अपने जल और जमीन से बेदखल किया जा रहा है। इस मामले में आदिवासी विधायक अनंत पटेल से जब जनज्वार ने बात की तो वो कहते हैं, गुजरात सरकार की आदिवासियों के खिलाफ नीतियों का वह पुरजोर विरोध करते हैं। हालांकि अभी विधानसभा का सत्र चालू ना होने की वजह से वह सदन में अपनी बात नहीं रख पा रहे, लेकिन विविध संस्थाओं और जागृत लोगों के माध्यम से सरकार के बहरे कानों में आवाज पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। सोशल मीडिया के माध्यम से भी आंदोलन तेज किया जा रहा है, जिसमें “जेल भरो केवडिया बचाओ” आंदोलन भी है। यह आंदोलन इसलिए चलाया गया है ताकि गुजरात सरकार जो कि आदिवासी विरोधी सरकार है, उनके बहरे शासकों-प्रशासकों के कानों तक आदिवासियों की आवाज पहुंचे।

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