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नैनीताल रेप केस: मुख्य गवाह ने बदला बयान 73 वर्षीय मोहम्मद उस्मान के खिलाफ क्या थीसाजिश

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नैनीताल रेप केस: मुख्य गवाह ने बदला बयान, क्या थी सांप्रदायिक साजिश?
मामले का अवलोकन
उत्तराखंड के नैनीताल में 30 अप्रैल 2025 को एक 12 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ कथित रेप का मामला सामने आया था। पीड़िता की मां ने मल्लीताल थाने में 73 वर्षीय ठेकेदार मोहम्मद उस्मान पर रेप का आरोप लगाते हुए FIR दर्ज कराई थी। इस घटना ने शहर में सांप्रदायिक तनाव को जन्म दिया, जिसके बाद हिंदूवादी संगठनों की भीड़ ने थाने के बाहर प्रदर्शन किया, नारेबाजी की, और बड़ा बाजार क्षेत्र में पत्थरबाजी व दुकानों में तोड़फोड़ की। जामा मस्जिद पर भी पथराव की घटना सामने आई, जिससे नैनीताल में कई दिनों तक तनाव का माहौल रहा।
मुख्य गवाह का यू-टर्न
मामले में नया मोड़ तब आया जब पीड़िता की पड़ोसी और मुख्य गवाह ने अपने बयान से पलटते हुए दावा किया कि उसे जबरदस्ती गवाह बनाया गया और झूठा बयान देने के लिए दबाव डाला गया। गवाह, जो पांच साल से नैनीताल में रह रही है, ने कहा कि उसने मोहम्मद उस्मान को कोई गलत काम करते नहीं देखा। उसका कहना है कि बच्ची सामान्य हालत में थी, उसके शरीर पर कोई चोट के निशान नहीं थे, और उसने घटना के बारे में कुछ नहीं बताया। गवाह ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने बिना पूछे उसे मुख्य गवाह बना दिया और कोर्ट व पुलिस स्टेशन के चक्कर में फंसाया।
सांप्रदायिक साजिश के आरोप
मोहम्मद उस्मान और उनके परिवार का दावा है कि यह मामला उनके खिलाफ एक साजिश है। उस्मान के बेटे, कासिम, ने बताया कि उनके पिता एक ठेकेदार हैं और उनके प्रतिद्वंद्वी अरविंद पटियाल ने कॉन्ट्रैक्ट न मिलने के कारण इस साजिश को अंजाम दिया। परिवार का कहना है कि मामले को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की गई, जिससे नैनीताल में मुस्लिम समुदाय की दुकानों और मस्जिद को निशाना बनाया गया।
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई
पुलिस ने रेप के आरोप में मोहम्मद उस्मान को गिरफ्तार कर लिया और उनके खिलाफ BNS की धारा 65(1), 351(2), और POCSO एक्ट के तहत मामला दर्ज किया। साथ ही, हिंसा और तोड़फोड़ के लिए अज्ञात लोगों के खिलाफ BNS की धाराओं 115(2), 324(2), 191(2), और 126(2) के तहत केस दर्ज किया गया। उत्तराखंड हाई कोर्ट ने हिंसा के लिए पुलिस को फटकार लगाई और सांप्रदायिक तनाव को नियंत्रित करने के लिए सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए।
नगर पालिका और हाई कोर्ट का हस्तक्षेप
नगर पालिका ने उस्मान के घर को अवैध कब्जे का नोटिस जारी किया था, लेकिन हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन न होने के कारण इस नोटिस को वापस लेने का आदेश दिया। कोर्ट ने प्रशासन को विधिसम्मत प्रक्रिया का पालन करने की चेतावनी दी।
मुस्लिम समुदाय की प्रतिक्रिया
नैनीताल के मुस्लिम समुदाय ने उस्मान को समाज से बहिष्कृत कर दिया और मस्जिद में प्रवेश व धार्मिक आयोजनों में भाग लेने पर रोक लगा दी। साथ ही, समुदाय ने पीड़िता के इलाज और पढ़ाई का खर्च उठाने की घोषणा की।
वर्तमान स्थिति और सामाजिक प्रभाव
मुख्य गवाह के बयान बदलने से मामला अब संदेह के घेरे में है। अगर यह आरोप अदालत में फर्जी साबित होता है, तो यह सांप्रदायिक साजिश के दावों को बल देगा। इस घटना ने नैनीताल के पर्यटन उद्योग पर भी गहरा असर डाला, क्योंकि तनाव के कारण पर्यटकों की संख्या में कमी आई और मॉल रोड जैसे व्यस्त क्षेत्र सुनसान हो गए।
निष्कर्ष
नैनीताल रेप केस ने न केवल कानूनी बल्कि सामाजिक और सांप्रदायिक स्तर पर भी कई सवाल खड़े किए हैं। मुख्य गवाह के बयान बदलने और साजिश के आरोपों ने मामले को और जटिल बना दिया है। अब अदालत में इसकी सच्चाई का खुलासा होना बाकी है, जो यह तय करेगा कि क्या यह वाकई एक सांप्रदायिक साजिश थी या वास्तविक अपराध।

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