◆नूरजहाँ
नूरजहां ने महान बनने के लिए बहुत मेहनत की थी और अपनी शर्तों पर जिंदगी को जिया था। उनकी ज़िंदगी में अच्छे मोड़ भी आए और बुरे भी, उन्होंने शादियां की, तलाक दिए, प्रेम संबंध बनाए, नाम कमाया और अपनी जिंदगी के अंतिम क्षणों में बेइंतहा तकलीफ भी झेली। एक बार पाकिस्तान की एक नामी शख़्सियत राजा तजम्मुल हुसैन ने उनसे हिम्मत कर पूछा कि आपके कितने आशिक रहे हैं अब तक? “तो आधे सच ही बता दीजिए”- तजम्मुल ने जोर दिया। उन्होंने गिनाना शुरू किया। कुछ मिनटों बाद उन्होंने तजम्मुल से पूछा, “कितने हुए अब तक?” तजम्मुल ने बिना पलक झपकाए जवाब दिया- अब तक सोलह! नूरजहां ने पंजाबी में क्लासिक टिप्पणी की- “हाय अल्लाह! ना-ना करदियां वी 16 हो गए ने!”
अपने करियर के शिखर पर भी पहुंचने के बावजूद भी नूरजहां की मानवीय मूल्यों में आस्था कम नहीं हुई थी। लेखक एजाज गुल बताते हैं नूरजहां अक्सर अपने घर पर गानों का रिहर्सल किया करती थीं। एक बार वे उनसे मिलने गए तो उन्होंने चाय मंगवाई। जब वो निसार को चाय दे रही थीं तो उसकी कुछ बूंदें प्याली से छलक कर उनके जूतों पर गिर गई। वो फौरन झुकीं और अपनी साड़ी के पल्लू से उन्होंने गिरी हुई चाय की बूंदों को साफ किया। निसार ने उन्हें बहुत रोका लेकिन उन्होंने कहा, आप जैसे लोगों की वजह से ही मैं इस मुकाम तक पहुंची हूं।”
बीबीसी के मुताबिक जब 1998 में नूरजहां को दिल का दौरा पड़ा, तो उनके एक मुरीद और नामी पाकिस्तानी पत्रकार खालिद हसन ने लिखा था- “दिल का दौरा तो उन्हें पड़ना ही था। पता नहीं कितने दावेदार थे उसके! और पता नहीं कितनी बार वह धड़का था उन लोगों के लिए जिन पर मुस्कराने की इनायत की थी उन्होंने।”





