कोलकाता, जयकृष्ण वाजपेयी। बंगाल विधानसभा चुनाव में ‘खेला होबे’ यानी ‘खेल होगा’ का नारा खूब लगा था। मुख्यमंत्री व तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी से लेकर उनके नेता-मंत्री सब यही नारा लगा रहे थे। दूसरी ओर इसके जवाब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर भाजपा के अन्य नेता-मंत्री ‘खेला शेष’ यानी ‘खेल खत्म’ का नारा बुलंद कर रहे थे, लेकिन असली खेल तो तृणमूल की ओर से भाजपा में रहते हुए मुकुल रॉय खेल रहे थे।
कभी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बाद पार्टी में सेकेंड-इन-कमान कहे जाने वाले रॉय ने बीते शुक्रवार को तमाम सस्पेंस खत्म कर दिया। दरअसल, वे भाजपा के संग होने का पिछले एक साल से ड्रामा कर रहे थे, उसे खत्म कर करीब साढ़े तीन साल बाद वे फिर तृणमूल में लौट गए। विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के महज 40 दिनों के भीतर ही उनकी ‘घर वापसी’ को लेकर सवाल उठने लगे हैं कि क्या वे पिछले एक साल से विधानसभा चुनाव में भाजपा के साथ होने और उसे जिताने का सिर्फ नाटक कर रहे थे?