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डॉ. जाकिर हुसैन की पुण्यतिथि: देश की जनता को दिए उनके प्रेरक शब्द

भारत के तीसरे और प्रथम मुस्लिम राष्ट्रपति, भारत रत्न डॉ. जाकिर हुसैन का निधन हुआ। उनकी पुण्यतिथि पर, हम उनके देश के प्रति समर्पण और शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान को याद करते हैं। एक महान शिक्षाविद्, स्वतंत्रता सेनानी और दूरदर्शी नेता के रूप में, उन्होंने अपने भाषणों के माध्यम से देशवासियों को एकता, समानता और नैतिक मूल्यों की प्रेरणा दी।
राष्ट्रपति पद के उद्घाटन भाषण में प्रेरक शब्द
13 मई, 1967 को राष्ट्रपति बनने पर डॉ. जाकिर हुसैन ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा था:
“सारा भारत मेरा घर है और उसके लोग मेरे परिवार के लोग हैं। लोगों ने कुछ समय के लिए मुझे अपना मुखिया चुना है। मैं सच्ची लगन से इस घर को मजबूत और सुंदर बनाने की कोशिश करूंगा। अगर मैं अपने देश के लिए कुछ भी कर पाया तो यह मेरा सौभाग्य होगा।”
यह शब्द उनके देश के प्रति प्रेम, एकता और सेवा की भावना को दर्शाते हैं। उन्होंने भारत को एक परिवार के रूप में देखा, जिसमें सभी धर्मों और समुदायों के लोग समान रूप से शामिल हैं।
धर्मनिरपेक्षता और शिक्षा पर विचार
1969 के गणतंत्र दिवस के भाषण में उन्होंने धर्मनिरपेक्षता को भारत की आत्मा बताते हुए कहा:
“धर्मनिरपेक्षता भारत की आत्मा है। जैसे हम अपनी आज़ादी की रक्षा करते हैं, वैसे ही इसकी भी करनी चाहिए।”
शिक्षा के महत्व पर बल देते हुए उन्होंने एक बार कहा:
“मैं मजबूती से इस सच के साथ खड़ा हूँ कि वास्तव में शिक्षा से ही राष्ट्र के उद्देश्यों को पूरा किया जा सकता है।”
“शिक्षा का उद्देश्य केवल पुस्तकीय ज्ञान प्राप्त करना नहीं है, बल्कि चरित्र निर्माण, नैतिकता और सामाजिक मूल्यों का विकास करना भी है।”
जामिया मिलिया इस्लामिया और राष्ट्रीय एकता
जामिया मिलिया इस्लामिया के संस्थापक सदस्य और 1926 से 1948 तक इसके कुलपति रहे डॉ. हुसैन ने शिक्षा को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला माना। अपने एक भाषण में उन्होंने कहा था:
“विभिन्न धर्मों के लोगों को आपसी सम्मान और सद्भाव के साथ रहना चाहिए।”
उनके नेतृत्व में जामिया ने स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान दिया और हिंदू-मुस्लिम एकता को बढ़ावा दिया।
आज की प्रासंगिकता
डॉ. जाकिर हुसैन के शब्द आज भी युवा पीढ़ी को जिम्मेदारी, सेवा और ज्ञान की राह पर चलने की प्रेरणा देते हैं। उनकी सादगी, अनुशासन और देश के प्रति समर्पण हमें यह सिखाते हैं कि सच्ची नेतृत्व की नींव नैतिकता और समावेशिता पर टिकी होती है। उनकी पुण्यतिथि पर, उनके विचारों को आत्मसात कर देश को और मजबूत बनाने का संकल्प लें।
डॉ. जाकिर हुसैन को उनकी पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि!

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