धर्मेंद्र जी रफी साहब पर लिखी एक किताब पढ़ रहे हैं। आप धरम जी का चेहरा देखकर अंदाज़ा लगा सकते हैं कि वो इस वक्त भावुक हैं। हों भी क्यों ना, रफी साहब उनके बहुत अच्छे दोस्त और पसंदीदा गायक जो थे। रफी साहब ने धरम जी के लिए सबसे पहले गाया था साल 1961 की फिल्म शोला और शबनम में। वो गीत था,’जाने क्या ढूंढती रहती हैं आंखे।’ उस वक्त का बहुत मशहूर गीत। इसी फिल्म में दो और गीतों को भी रफी साहब ने अपनी आवाज़ दी थी। जिनके बोल थे,’जीत ही लेंगे बाज़ी हम तुम’ और ‘पहले तो आंख मिलाना’।
जो पहला गीत रफी साहब ने धर्मेंद्र जी के लिए गाया था उसी की रिकॉर्डिंग के वक्त इन दोनों हस्तियों की पहली मुलाकात हुई थी। एक इंटरव्यू में उस दिन को याद करते हुए धर्मेंद्र जी ने कहा था,”वो हमेशा मुस्कुराते रहते थे। गुस्सा तो उनके चेहरे पर कभी दिखा ही नहीं। वो मेरे लिए भाई जैसे थे। शोला और शबनम के इसी गीत की रिकॉर्डिंग के दिन मैं पहली दफा रफी साहब से मिला था। उस दिन तो मानो मेरा सपना पूरा हो गया था। मुझे बाद में पता चला था कि जब रफी साहब वो गाना रिकॉर्ड कर रहे थे, तब उन्हें बुखार हो रहा था। लेकिन कमाल देखिए, रफी साहब ने उस हालत में भी वो गाना कितना खूबसूरत गाया।”
रफी साहब के बारे में बात करते हुए एक दफा धर्मेंद्र जी ने कहा था,”मैं उस ज़माने से रफी साहब के फैन हूं जब मैं फिल्मी दुनिया में आया भी नहीं था। रफी साहब मेरे कैसे भी सॉन्ग के साथ अपनी आवाज़ को मेरे कैरेक्टर संग मैच करा देते थे। और मेरे ही क्या, किसी भी एक्टर के साथ रफी साहब ये कमाल बड़े आराम से करते थे। मैं दिल से ये बात बोल रहा हूं कि अगर मेरा बस चलता तो मैं अपने किसी भी गाने को रफी साहब के अलावा किसी दूसरे गायक से ना गवाने देता। हालांकि ऐसा नहीं है कि मैं किसी और गायक को पसंद नहीं करता। मैं सबको पसंद करता हूं और सबका सम्मान करता हूं।





