कांवड़ यात्रा एक धार्मिक यात्रा है,
जिसमें कांवड़िया गंगा नदी से जल लेकर शिव मंदिरों में शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं. यह यात्रा सावन के महीने में की जाती है,और इसका उद्देश्य भगवान शिव को प्रसन्न करना होता है, कांवड़ यात्रा की शुरुआत एक पौराणिक कथा से जुड़ी हुई है,जिसमें भगवान शिव ने विष को अपने अंदर ले लिया था,और इसके बाद उन्हें विष की नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति दिलाने के लिए उनके भक्त रावण ने गंगा का पवित्र जल लाया था,
इसी वजह से कांवड़िया भगवान शिव के भक्त होते हैं जो सावन के महीने में गंगा नदी से जल लेकर शिव मंदिरों में शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं,
सामान्य कांवड़ के लिए निर्देश इस कांवड़ यात्रा में शिव भक्त बीच में रुककर आराम कर सकते हैं, लेकिन उन्हें एक बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि यात्रा के दौरान कांवड़ को जमीन पर नहीं रखना चाहिए ²।





