Home / अंतरराष्ट्रीय / ईरानी डिप्टी चीफ मोहम्मद जावेद ने दी चेतावनी, ‘पाकिस्तान अगर इजराइल-अमेरिका के साथ गया तो भुगतेगा गंभीर परिणाम

ईरानी डिप्टी चीफ मोहम्मद जावेद ने दी चेतावनी, ‘पाकिस्तान अगर इजराइल-अमेरिका के साथ गया तो भुगतेगा गंभीर परिणाम

Spread the love

भारत में ईरानी दूतावास के उप प्रमुख मोहम्मद जावेद हुसैनी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल ‘आसिम मुनीर’ के बीच हालिया मुलाकात पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ईरान शांति और सुरक्षा के पक्ष में है और हमेशा वार्ता के लिए तैयार है, लेकिन इजराइल के सैन्य हमलों की कड़ी निंदा करता है। जावेद ने चेतावनी दी कि यदि पाकिस्तान ने इजराइल और अमेरिका का साथ दिया, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि पड़ोसी देश होने के नाते पाकिस्तान ईरान के साथ खड़ा रहेगा।
पृष्ठभूमि:
ट्रंप-मुनीर मुलाकात: 18 जून 2025 को व्हाइट हाउस में डोनाल्ड ट्रंप और जनरल आसिम मुनीर की मुलाकात हुई, जिसमें ईरान-इजराइल संघर्ष और क्षेत्रीय स्थिरता पर चर्चा हुई। ट्रंप ने पाकिस्तान की क्षेत्रीय भूमिका की सराहना की और संकेत दिया कि पाकिस्तान ईरान को अच्छी तरह समझता है, लेकिन वह इजराइल के प्रति भी नरम रुख रख सकता है।
ईरान-इजराइल तनाव: इजराइल ने ईरान पर हालिया हमले किए, जिसके जवाब में ईरान ने तेल अवीव पर मिसाइलें दागीं। ट्रंप ने इजराइल का समर्थन करते हुए कहा कि उन्हें हमलों की जानकारी थी और ईरान को 60 दिन का समय दिया गया था।
पाकिस्तान की स्थिति: पाकिस्तान ने सार्वजनिक रूप से ईरान का समर्थन किया और इजराइल की निंदा की, लेकिन ट्रंप के साथ मुलाकात ने संदेह पैदा किया है कि पाकिस्तान अमेरिका के साथ रणनीतिक सहयोग कर सकता है, संभवतः ईरान के खिलाफ।
ईरान का रुख: मोहम्मद जावेद ने कहा कि इजराइल ने निराधार आरोपों के आधार पर ईरान पर हमला किया, और ईरान ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की। उन्होंने विश्व समुदाय से इजराइल पर दबाव बनाने की मांग की।
प्रतिक्रियाएं और विश्लेषण:
जावेद का बयान इस बात का संकेत है कि ईरान, पाकिस्तान की ट्रंप के साथ बढ़ती नजदीकियों से चिंतित है, खासकर तब जब पाकिस्तान ने पहले ईरान के साथ एकजुटता दिखाई थी।
विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका, ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के लिए पाकिस्तान से एयरबेस या अन्य सहायता मांग सकता है, जैसा कि उसने अफगानिस्तान युद्ध के दौरान किया था।
पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने ईरान के समर्थन की बात की, लेकिन मुनीर की अमेरिका यात्रा ने इस्लामाबाद की मंशा पर सवाल उठाए हैं।
निष्कर्ष: मोहम्मद जावेद हुसैनी की चेतावनी से क्षेत्रीय तनाव और जटिल हो गया है। पाकिस्तान की दोहरी नीति—ईरान के साथ सार्वजनिक समर्थन और अमेरिका के साथ रणनीतिक निकटता—क्षेत्र में एक नाजुक संतुलन को दर्शाती है, जिसके गंभीर भू-राजनीतिक परिणाम हो सकते हैं

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *