मुस्लिम समाज को एक से अधिक पत्नी (बहुविवाह) की इजाज़त देने वाले कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है ।
याचिका में मुस्लिम को बहुविवाह की परमिशन देने वाले मुस्लिम पर्सनल ला एप्लीकेशन एक्ट 1937 की धारा- 2 को सुप्रीम कोर्ट में रद्द करने मांग की गई है। इस कानून से महिलाओं के साथ भेदभाव और अनुच्छेद 14 और 15(1) का उल्लंघन घोषित करें। जिसमें कहा गया है कि धर्म के आधार पर दंड के प्रधान विभिन्न नहीं हो सकते। यह याचिका हरिशंकर जैन और विष्णु शंकर जैन के द्वारा या याचिका जन उद्घोष संस्था और पांच महिलाओं ने दाखिल की है।