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अजब बिहार: चपरासी भर्ती एडमिट कार्ड पर छात्र की जगह कुत्ते की फोटो, वायरल हुआ मामला

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रोहतास, 13 मार्च 2026: बिहार की भर्ती प्रक्रिया एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार एक शर्मनाक वजह से। रोहतास जिले के बिक्रमगंज अनुमंडल के धावा गांव के रितेश कुमार ने जिला एवं सत्र न्यायालय (सिविल कोर्ट) में चपरासी पद के लिए चार साल पहले आवेदन किया था। लंबे इंतजार के बाद 15 मार्च को निर्धारित परीक्षा के एडमिट कार्ड में उनकी फोटो की जगह एक कुत्ते की तस्वीर छप गई, जिससे पूरा मामला सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।�रितेश ने बताया कि एडमिट कार्ड पर उनका नाम, पिता का नाम, जन्मतिथि और अन्य सभी विवरण सही हैं, लेकिन फोटो पूरी तरह गलत है। उन्होंने आवेदन के समय अपनी सही फोटो अपलोड की थी, फिर भी यह चूक हुई। शिकायत के बावजूद बोर्ड ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की, जिससे परीक्षा केंद्र सहरसा पहुंचने में परेशानी हो सकती है।�लंबा इंतजार और अचानक गड़बड़ी2022 में शुरू हुई इस भर्ती प्रक्रिया के लिए सैकड़ों उम्मीदवारों ने आवेदन किया था। सालों की देरी के बाद परीक्षा की तारीख घोषित हुई, लेकिन एडमिट कार्डों में यह बड़ी लापरवाही सामने आई। रितेश ने बोर्ड कार्यालय जाकर शिकायत की, लेकिन अधिकारियों ने केवल आश्वासन दिया। परीक्षा से महज दो दिन पहले यह स्थिति अन्य उम्मीदवारों के लिए भी चिंता का विषय बनी हुई है।�स्थानीय लोगों का कहना है कि ऑनलाइन सिस्टम में तकनीकी खराबी या डेटाबेस मिसमैच के कारण ऐसा हुआ। कुछ का मानना है कि यह साइबर हस्तक्षेप भी हो सकता है, क्योंकि पहले भी बिहार में ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं।�सोशल मीडिया पर मचा हंगामाएडमिट कार्ड की कुत्ते वाली फोटो वायरल होते ही नेटिजंस ने इसे ‘अजब बिहार की गजब परीक्षा’ कहकर मीम्स बनाना शुरू कर दिया। ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर #DogAdmitCard और #BiharPeonExam ट्रेंड कर रहा है। लोग भर्ती बोर्ड की लापरवाही पर सवाल उठा रहे हैं और तत्काल सुधार की मांग कर रहे हैं।�रितेश ने कहा, “इतने सालों का सपना टूटने वाला है। हंसी उड़ रही है, लेकिन मेरा भविष्य दांव पर है। बोर्ड को जिम्मेदार बनना चाहिए।” इस घटना ने बिहार सरकार के डिजिटल भर्ती पोर्टल की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।�क्या कहते हैं विशेषज्ञ?भर्ती विशेषज्ञों का मानना है कि फोटो वेरिफिकेशन प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप की कमी और पुराने सॉफ्टवेयर के कारण ऐसी गलतियां होती हैं। पटना से एक आईटी विशेषज्ञ ने बताया, “डेटाबेस में फोटो मर्जिंग एरर आम है, लेकिन इतनी बड़ी चूक दुर्भाग्यपूर्ण है। उम्मीदवार को वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए।” अब तक बोर्ड की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।�आगे क्या? परीक्षा दोपहर 12 बजे से होनी है। रितेश समेत अन्य प्रभावित उम्मीदवार उच्च न्यायालय का रुख करने की सोच रहे हैं। यह मामला बिहार में भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बहस छेड़ सकता है।

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