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अखिलेश यादव और सपा सांसदों ने SIR व ‘वोट चोरी’ के खिलाफ संसद परिसर में प्रदर्शन किया, लगाए नारे- “वोट चोर, गद्दी छोड़”

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18 अगस्त 2025, दोपहर 12:30 बजे IST

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नई दिल्ली: समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के नेतृत्व में सपा सांसदों और इंडिया गठबंधन के अन्य नेताओं ने 18 अगस्त 2025 को संसद परिसर में बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कथित ‘वोट चोरी’ के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान “वोट चोर, गद्दी छोड़” और “SIR नहीं चलेगा” जैसे नारे लगाए गए। प्रदर्शनकारी सांसदों ने तख्तियां थामीं, जिन पर ‘SIR लोकतंत्र पर हमला है’ और ‘वोटबंदी बंद करो’ जैसे नारे लिखे थे।

प्रदर्शन संसद के मकर द्वार से शुरू हुआ और चुनाव आयोग (ECI) के दफ्तर तक मार्च के रूप में आगे बढ़ा, लेकिन दिल्ली पुलिस ने रास्ते में बैरिकेड लगाकर इसे रोक दिया। इस दौरान अखिलेश यादव ने पुलिस बैरिकेड पर चढ़कर उसे पार करने की कोशिश की, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। प्रदर्शन में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाद्रा, डीएमके सांसद दयानिधि मारन, तृणमूल कांग्रेस की महुआ मोइत्रा, और आरजेडी के मनोज झा व मीसा भारती सहित 300 से अधिक सांसद शामिल थे।

अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि SIR के जरिए बीजेपी और चुनाव आयोग मिलकर मतदाता सूची में हेरफेर कर रहे हैं, खासकर पिछड़े, दलित, और अल्पसंख्यक समुदायों के वोटरों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा, “हमने दो साल पहले 18,000 वोटरों के नाम काटे जाने का शपथ पत्र दिया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। बीजेपी सत्ता के दम पर वोट चोरी कर रही है।”

राहुल गांधी ने इसे लोकतंत्र पर हमला करार देते हुए कहा, “SIR के नाम पर वोटरों का अधिकार छीना जा रहा है। हम संविधान विरोधी ताकतों के खिलाफ एकजुट होकर लड़ेंगे।” प्रियंका गांधी ने भी इसे ‘वोटबंदी’ की साजिश बताया और कहा कि बिहार में मतदाता सूची से नाम काटकर बीजेपी अपनी हार को जीत में बदलने की कोशिश कर रही है

विपक्षी नेताओं का दावा है कि SIR प्रक्रिया में 56-65 लाख अपात्र मतदाताओं के नाम हटाने की बात कही जा रही है, जिसमें ज्यादातर गरीब और वंचित वर्गों के लोग शामिल हैं। चुनाव आयोग ने इसे पारदर्शी प्रक्रिया बताते हुए कहा कि SIR का उद्देश्य मृत, डुप्लिकेट, और स्थानांतरित मतदाताओं को हटाकर मतदाता सूची को शुद्ध करना है। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में कहा कि यह प्रक्रिया जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 के तहत है और इसमें कोई पक्षपात नहीं है।

प्रदर्शन के बाद विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग से मुलाकात का समय मांगा ताकि अपनी शिकायतें और सबूत पेश कर सकें। यह प्रदर्शन न केवल बिहार बल्कि पूरे देश में चुनावी पारदर्शिता के लिए विपक्ष की एकजुटता का संदेश देता है। सत्तारूढ़ बीजेपी ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि विपक्ष हार के डर से संस्थाओं पर अविश्वास पैदा कर रहा है।

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