राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने 24 जुलाई 2025 को दिल्ली के हरियाणा भवन में मुस्लिम धर्मगुरुओं, बुद्धिजीवियों और इमामों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य हिंदू-मुस्लिम समुदायों के बीच संवाद को बढ़ावा देना, गलतफहमियों को दूर करना, और सामाजिक समरसता को मजबूत करना था।
*बैठक के मुख्य बिंदु:*
– *हिंदू-मुस्लिम एकता*: मोहन भागवत ने जोर देकर कहा कि भारत में सभी धर्मों के लोग एक ही डीएनए साझा करते हैं और पूजा के तरीकों के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए।
– *संवेदनशील मुद्दे*: लिंचिंग, वक्फ बोर्ड, और मदरसों की स्थिति जैसे मुद्दों पर खुलकर चर्चा हुई और दोनों पक्षों ने इन्हें समाज के लिए हानिकारक बताया।
– *राष्ट्रीय विकास*: बैठक में यह सहमति बनी कि देश के विकास के लिए सभी समुदायों को एकजुट होकर काम करना होगा।
*बैठक का महत्व:*
– *सामाजिक और राजनीतिक महत्व*: यह बैठक RSS की सामान्य छवि से हटकर है, क्योंकि संगठन को अक्सर हिंदू राष्ट्रवादी और दक्षिणपंथी संगठन के रूप में देखा जाता है।
– *भविष्य की संभावनाएँ*: दोनों पक्षों ने सहमति जताई कि इस तरह की बैठकों का सिलसिला जारी रहेगा और सामाजिक एकता और देश के विकास को नई दिशा मिल सकती है।
*निष्कर्ष:*
24 जुलाई 2025 की यह बैठक हिंदू-मुस्लिम एकता, सामाजिक समरसता, और राष्ट्रीय विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। RSS की यह पहल सामाजिक और सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा देने की दिशा में एक सकारात्मक प्रयास है।




