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कंबोडिया और थाईलैंड के बीच सीमा विवाद के चलते हालात युद्ध जैसे बन गए

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कंबोडिया और थाईलैंड के बीच सीमा विवाद के चलते हालात युद्ध जैसे बन गए हैं। यह तनाव 24 जुलाई 2025 को चरम पर पहुंचा, जब दोनों देशों की सेनाओं के बीच थाईलैंड के सुरिन प्रांत और कंबोडिया के ओड्डार मीनचे प्रांत की सीमा पर भारी गोलीबारी और रॉकेट हमले हुए। इस टकराव में कम से कम 12 लोग मारे गए, जिनमें 11 थाई नागरिक और एक थाई सैनिक शामिल हैं, साथ ही कई लोग घायल हुए, जिनमें एक 8 साल का बच्चा भी था। कंबोडिया ने अपनी ओर से किसी हताहत की पुष्टि नहीं की है।

*संघर्ष का कारण:*

– *पृष्ठभूमि*: कंबोडिया और थाईलैंड के बीच सीमा विवाद का मूल 1907 के फ्रांसीसी औपनिवेशिक नक्शे में है, जिसे कंबोडिया के लिए बनाया गया था। थाईलैंड इस नक्शे की प्रामाणिकता पर सवाल उठाता है।
– *प्रीह विहार मंदिर*: विवाद का केंद्र प्रीह विहार मंदिर और इसके आसपास का क्षेत्र है। 1962 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने इस मंदिर पर कंबोडिया का अधिकार माना, लेकिन आसपास के क्षेत्रों का स्वामित्व अभी भी अस्पष्ट है।

*हाल की घटनाएँ:*

– *गोलीबारी और हवाई हमले*: थाई वायुसेना ने कंबोडियाई सैन्य ठिकानों पर F-16 लड़ाकू विमानों से हवाई हमले किए। कंबोडिया ने BM-21 रॉकेट लॉन्चरों का उपयोग किया और थाईलैंड के हमलों का जवाब दिया।
– *हानि*: थाईलैंड के अनुसार, 11 नागरिक और 1 सैनिक मारे गए। कई लोग घायल हुए, जिनमें एक 8 साल का बच्चा शामिल है। कंबोडिया ने अपनी ओर से किसी हताहत की जानकारी साझा नहीं की।

*राजनयिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ:*

– *थाईलैंड*: थाईलैंड ने अपने राजदूत को कंबोडिया से वापस बुला लिया और कंबोडियाई दूत को निष्कासित कर दिया। कार्यवाहक प्रधानमंत्री फुमथम वेचायचाई ने कहा कि बातचीत तभी संभव है जब लड़ाई पूरी तरह रुक जाए।
– *कंबोडिया*: कंबोडिया ने भी अपने राजनयिकों को वापस बुलाया और थाई मीडिया और आयात पर प्रतिबंध लगा दिया। कंबोडिया के प्रधानमंत्री हुन मैनेट ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से तत्काल बैठक बुलाने की मांग की।

*अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया:*

– *संयुक्त राष्ट्र*: संयुक्त राष्ट्र ने दोनों देशों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की अपील की है।
– *ASEAN*: आसियान देशों ने मध्यस्थता की पेशकश की है, लेकिन अभी तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई।

*प्रभाव और भविष्य की संभावनाएँ:*

– *स्थानीय प्रभाव*: सीमा क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में दहशत है। कई गांव खाली करा लिए गए हैं। व्यापार और पर्यटन पर असर पड़ा है।
– *संभावित परिणाम*: यदि तनाव कम नहीं हुआ, तो यह क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बन सकता है। अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता या ICJ में दोबारा मामला ले जाया जा सकता है, लेकिन दोनों देशों का रुख अभी सख्त है।

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