टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने सुप्रीम कोर्ट में एक रिट याचिका दायर की है, जिसमें बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) को चुनौती दी गई है। उनका तर्क है कि यह प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(A), 21, 325 और 326 का उल्लंघन करती है, साथ ही जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960 का भी उल्लंघन करती है। मोइत्रा का दावा है कि इस संशोधन से पहले से पंजीकृत मतदाताओं के अधिकार छीने जा सकते हैं और मतदाता अधिकारों को दबाने के लिए इसका दुरुपयोग हो सकता है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि निर्वाचन आयोग को अन्य राज्यों में इस तरह की अधिसूचनाएं जारी करने से रोका जाए। ¹
*महुआ मोइत्रा की याचिका के मुख्य बिंदु:*
– *मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया*: मोइत्रा ने निर्वाचन आयोग द्वारा शुरू की गई मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया को असंवैधानिक बताया है।
– *मतदाता अधिकारों का हनन*: उनका तर्क है कि इस प्रक्रिया से मतदाताओं के अधिकार छीने जा सकते हैं और इसका दुरुपयोग हो सकता है।
– *सुप्रीम कोर्ट का निर्देश*: मोइत्रा ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि निर्वाचन आयोग को अन्य राज्यों में इस तरह की अधिसूचनाएं जारी करने से रोका जाए।
अब देखना यह है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर क्या निर्णय लेता है और इसका मतदाता अधिकारों पर क्या प्रभाव पड़ता है।




