नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा है कि दुनिया प्रेम और मंगल की भाषा तभी सुनती है, जब आपके पास शक्ति हो। उन्होंने जोर देकर कहा कि विश्व कल्याण के लिए भारत को शक्ति संपन्न होना आवश्यक है, क्योंकि यह दुनिया का स्वभाव है, जिसे बदला नहीं जा सकता। भागवत ने स्पष्ट किया कि भारत किसी से शत्रुता नहीं रखता, लेकिन यदि कोई दुस्साहस करता है, तो उसे सबक सिखाने से पीछे नहीं हटेगा।
पाकिस्तान के साथ चल रहे तनाव के बीच आए इस बयान को भारत की सैन्य क्षमता और कूटनीतिक मजबूती के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। भागवत ने कहा कि भारत दुनिया में बड़े भाई की भूमिका निभा रहा है, लेकिन उसे इस पर घमंड नहीं करना चाहिए। उन्होंने शक्ति के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि वैश्विक कल्याण के लिए भारत को अपनी ताकत बढ़ानी होगी।
भारत को शक्ति संपन्न होना जरूरी, दुनिया प्रेम की भाषा ताकत से सुनती है: मोहन भागवत



