ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची 7-8 मई 2025 को भारत की आधिकारिक यात्रा पर हैं।
इस दौरान वे नई दिल्ली में भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की,
यह यात्रा भारत-ईरान के बीच 20वीं संयुक्त आर्थिक आयोग की बैठक के साथ-साथ क्षेत्रीय और द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा के लिए महत्वपूर्ण है।
माना जा रहा है भारत और पाकिस्तान के बीच हाल के तनाव, विशेष रूप से पहलगाम आतंकी हमले के बाद, और क्षेत्रीय स्थिरता पर विचार-विमर्श।
आर्थिक सहयोग: चाबहार बंदरगाह परियोजना और ऊर्जा व्यापार सहित भारत-ईरान द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देना।
संयुक्त आर्थिक आयोग: दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में सहयोग बढ़ाने के लिए रणनीति तैयार करना।
यह यात्रा भारत-ईरान संबंधों को मजबूत करने और क्षेत्रीय शांति के लिए महत्वपूर्ण है, खासकर तब जब ईरान ने भारत-पाक तनाव में मध्यस्थता की पेशकश की थी, जिसे भारत ने ठुकरा दिया था।
चीनी राष्ट्रपति की रूस यात्रा
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 7-10 मई 2025 को रूस की राजकीय यात्रा पर हैं, जहां वे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ मुलाकात करेंगे। यह यात्रा द्वितीय विश्वयुद्ध में नाजी जर्मनी पर सोवियत संघ की जीत की 80वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में मास्को में आयोजित समारोह के साथ-साथ दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को गहरा करने के लिए है।
शिखर सम्मेलन के मुख्य बिंदु:
द्विपक्षीय संबंध: आर्थिक सहयोग, व्यापार और रक्षा क्षेत्र में चीन-रूस रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना।
क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दे: भारत-पाक तनाव, यूक्रेन-रूस संघर्ष, और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता पर चर्चा।
विजय दिवस समारोह: शी जिनपिंग मास्को में विजय परेड में भाग लेंगे, जिसमें कई अन्य देशों के नेता भी शामिल होंगे।
वैश्विक महत्व
ये बैठकें वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि क्षेत्रीय तनाव और वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव के बीच देश अपनी स्थिति मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं। भारत-ईरान बैठक क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक सहयोग पर केंद्रित है, जबकि चीन-रूस शिखर सम्मेलन वैश्विक रणनीतिक गठबंधनों को और सुदृढ़ कर सकता ह।



