बिहार में वक्फ संशोधन बिल को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। जनता दल यूनाइटेड (JDU) के कई मुस्लिम नेताओं ने इस बिल के समर्थन से नाराज होकर पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। इस मामले ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी में अंदरूनी कलह को जन्म दे दिया है। इस्तीफों की बाढ़ के बाद JDU ने डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश में आनन-फानन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई। यह प्रेस कॉन्फ्रेंस पटना में JDU दफ्तर में अल्पसंख्यक मोर्चा के नेताओं ने की, जिसमें उन्होंने अपनी बात रखने की कोशिश की।
क्या है वक्फ बिल का मामला?
वक्फ संशोधन बिल 2025 को हाल ही में संसद के दोनों सदनों में पास किया गया है। केंद्र सरकार का कहना है कि यह बिल वक्फ संपत्तियों में पारदर्शिता लाने और मुस्लिम समुदाय को उनकी जमीन वापस दिलाने के लिए है। लेकिन कई मुस्लिम संगठनों और नेताओं का मानना है कि यह बिल उनके अधिकारों पर हमला है। JDU ने इस बिल का समर्थन किया, जिसके बाद पार्टी के मुस्लिम नेताओं में गुस्सा भड़क उठा।
इस्तीफों की लहर
बिल के समर्थन के बाद JDU के कई बड़े मुस्लिम नेताओं ने पार्टी छोड़ दी। मोहम्मद कासिम अंसारी, शाहनवाज मलिक, तबरेज सिद्दीकी अलीग और राजू नैय्यर जैसे नेताओं ने इस्तीफा दे दिया। औरंगाबाद में तो 20 से ज्यादा मुस्लिम पदाधिकारियों ने एक साथ पार्टी से किनारा कर लिया। इन नेताओं का कहना है कि JDU ने मुस्लिम समुदाय का भरोसा तोड़ा है और नीतीश कुमार की सेक्युलर छवि को धक्का लगा है। इस्तीफा देने वालों ने कहा कि यह बिल संविधान के मूल अधिकारों का हनन करता है और मुस्लिम विरोधी है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या बोले नेता?
JDU अल्पसंख्यक मोर्चा की प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेताओं ने पार्टी का बचाव करने की कोशिश की। उनका कहना था कि नीतीश कुमार ने हमेशा मुस्लिम समुदाय के हित में काम किया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद नेताओं ने दावा किया कि बिल से मुस्लिम समुदाय को फायदा होगा और उनकी शंकाओं को दूर करने के लिए पार्टी ने संसद में उनकी बात रखी थी। हालांकि, जब सवालों का दौर शुरू हुआ तो कुछ नेता असहज दिखे। खबरों के मुताबिक, MLC गुलाम गौस जैसे नेता सवाल सुनते ही प्रेस कॉन्फ्रेंस छोड़कर चले गए, जिससे मामला और गरमा गया।
नीतीश पर बढ़ा दबाव
बिहार में कुछ महीनों बाद विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में मुस्लिम वोटरों की नाराजगी JDU के लिए मुश्किल खड़ी कर सकती है। विपक्षी दल, खासकर RJD, इस मौके का फायदा उठाने में जुट गए हैं। RJD कार्यालय के बाहर नीतीश कुमार को “गिरगिट” कहकर तंज कसते हुए पोस्टर लगाए गए हैं। JDU का कहना है कि इस्तीफा देने वाले नेताओं का पार्टी से कोई बड़ा जुड़ाव नहीं था, लेकिन यह साफ है कि मामला अब हाथ से निकलता जा रहा है।
आगे क्या?
JDU अब अपने मुस्लिम नेताओं को मनाने और वोटरों का भरोसा वापस जीतने की कोशिश में लगी है। लेकिन जिस तरह से इस्तीफे हो रहे हैं और प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेताओं का रवैया सामने आया, उससे सवाल उठ रहे हैं कि क्या नीतीश कुमार इस संकट से उबर पाएंगे? बिहार की सियासत में यह मुद्दा अभी और तूल पकड़ सकता है।
वक्फ बिल पर बवाल: JDU के मुस्लिम नेताओं की नाराजगी, प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी सफाई





