देहरादून, 25 मार्च 2025: उत्तराखंड सरकार ने अवैध मदरसों के खिलाफ सख्त अभियान छेड़ रखा है,
जो राज्य में कानून व्यवस्था और मूल स्वरूप को बनाए रखने दिशा में कार्य बताया
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रशासन ने अब तक पूरे प्रदेश में 136 अवैध मदरसों को सील कर दिया है।
इन मदरसों पर बिना पंजीकरण के संचालन और संदिग्ध गतिविधियों के आरोप लगते रहे हैं।
इस कार्रवाई ने न केवल अवैध गतिविधियों पर लगाम कसी है, बल्कि फर्जी धर्मगुरुओं के गोरखधंधे को भी उजागर किया है।
अवैध मदरसों पर लगातार कार्रवाई
उत्तराखंड में पिछले कुछ महीनों से अवैध मदरसों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई जारी है। हाल ही में ऊधम सिंह नगर जिले में 16 और हरिद्वार में 2 मदरसों को सील किया गया। इससे पहले देहरादून, विकासनगर, खटीमा, रुद्रपुर, किच्छा, बाजपुर और अन्य जिलों में भी बड़े पैमाने पर कार्रवाई की गई। प्रशासन के मुताबिक, ये मदरसे बिना किसी वैधानिक मान्यता और पंजीकरण के संचालित हो रहे थे, जिससे बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा पर सवाल उठ रहे थे। सरकार का कहना है कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और किसी भी अवैध गतिविधि को बख्शा नहीं जाएगा।
फर्जी धर्मगुरुओं पर सवाल
इस अभियान ने उन फर्जी धर्मगुरुओं को भी कठघरे में ला खड़ा किया है, जो धर्म की आड़ में गैरकानूनी गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे। इस्लाम में झूठ बोलना, धोखा देना और दांडी मारना गंभीर अपराध माना जाता है, फिर भी कुछ तथाकथित धर्मगुरु अवैध मदरसों के जरिए फर्जी गोरखधंधा चला रहे थे। इनमें से कई मदरसों में बिना पंजीकरण के बच्चों को रखा जा रहा था और उनकी फंडिंग के स्रोत भी संदिग्ध पाए गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे लोगों पर न केवल कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, बल्कि इन्हें सामाजिक रूप से बहिष्कृत भी किया जाना चाहिए।
सरकार का सख्त रुख
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया है कि उत्तराखंड के मूल स्वरूप और सांस्कृतिक पहचान के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा, “जो भी धर्म की आड़ में अवैध गतिविधियों में लिप्त पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।” सरकार ने इन मदरसों की फंडिंग की जांच के लिए भी विशेष टीम गठित की है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनके पीछे कौन लोग और संगठन काम कर रहे हैं।
जनता और संगठनों की प्रतिक्रिया
इस कार्रवाई को जहां कई लोग राज्य में कानून का राज स्थापित करने की दिशा में एक मजबूत कदम मान रहे हैं, वहीं कुछ मुस्लिम संगठनों ने इसका विरोध भी किया है। जमीअत उलमा-ए-हिंद ने इसे असंवैधानिक करार देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। संगठन का कहना है कि बिना नोटिस के मदरसों को सील करना गलत है और इससे बच्चों की धार्मिक शिक्षा प्रभावित हो रही है। हालांकि, सरकार का तर्क है कि यह कार्रवाई केवल अवैध और गैर-पंजीकृत संस्थानों के खिलाफ है, न कि किसी धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला।
आगे की राह
उत्तराखंड में अभी भी करीब 500 अवैध मदरसों के संचालन की खबरें हैं, जिनमें से 136 पर अब तक कार्रवाई हो चुकी है। प्रशासन ने इनकी फंडिंग, संचालकों और गतिविधियों की गहन जांच शुरू कर दी है। यह अभियान न केवल अवैध निर्माण और अतिक्रमण को खत्म करने की दिशा में एक कदम है, बल्कि राज्य की सुरक्षा और बच्चों के भविष्य को सुनिश्चित करने का भी प्रयास है। जनता से भी अपील की गई है कि यदि उन्हें ऐसे किसी अवैध मदरसे की जानकारी मिले, तो प्रशासन को सूचित करें।




