IIT बाबा या अभय सिंह एक पूर्व आईआईटी छात्र हैं जिन्होंने अपनी कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर संन्यासी बनने का निर्णय लिया। वह खुद को ‘आध्यात्मिक वैज्ञानिक’ बताते हैं और धर्म और विज्ञान के बीच एक सेतु बनाने का मकसद रखते हैं। उनका मानना है कि विज्ञान और अध्यात्म एक दूसरे के विरोधी नहीं हैं, बल्कि दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं ¹।
उनकी लोकप्रियता महाकुंभ 2025 में उनकी मौजूदगी से बढ़ी, जहां उन्हें ‘इंजीनियर बाबा’ के नाम से भी जाना गया। उनके सोशल मीडिया पर लाखों फॉलोअर्स हैं, और उनके भक्त उन्हें ‘फ्यूचर प्रेडिक्टर’ और ‘मॉडर्न योगी’ कहते हैं।
हालांकि, कई संत और धार्मिक गुरु उन्हें ‘फेक बाबा’ कहकर उनकी आलोचना कर रहे हैं क्योंकि वह पारंपरिक संन्यास परंपरा को फॉलो नहीं करते और उनके रहन-सहन से वह किसी आधिकारिक संत या योगी जैसे नहीं लगते ¹।
कुछ लोगों का मानना है कि IIT बाबा ने अपनी जिंदगी को एक उच्च उद्देश्य के लिए समर्पित किया है और वह युवा पीढ़ी को आध्यात्मिकता से जोड़ने का काम कर रहे हैं। दूसरी ओर, कुछ लोग उन्हें ‘फेक बाबा’ कहते हैं और उनकी आलोचना करते हैं क्योंकि वह धर्म का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं और उनकी भविष्यवाणियां असत्य साबित हो रही हैं।





