शेख अब्दुल कादिर जिलानी की 11वीं शरीफ उनके जन्मदिन के उपलक्ष्य में मनाई जाती है, जो प्रत्येक चांद्र मास की 11 तारीख को आती है। यह दिन सूफी समुदाय में बहुत महत्वपूर्ण है, जिसमें लोग आध्यात्मिक ज्ञान, प्रेम, और एकता के महत्व को समझने के लिए एकत्र होते हैं।
उत्सव के तरीके:
भारत, पाकिस्तान, इराक, और अन्य देशों में यह उत्सव विभिन्न तरीकों से मनाया जाता है:
1. धार्मिक अनुष्ठान
2. प्रार्थना
3. सूफी संगीत और कविता
4. आध्यात्मिक विचार-विमर्श
5. दान और सेवा कार्य
6. मलीदा (मीठा व्यंजन) तैयार करना
7. चिराग जलाना
महत्व:
1. शेख अब्दुल कादिर जिलानी को याद करना और ईसाल-ए-सवाब करना।
2. आध्यात्मिक ज्ञान की प्राप्ति।
3. एकता और भाईचारे को बढ़ावा देना।
4. प्रेम और करुणा के महत्व को समझना।
5. सूफी परम्परा का महत्व।
विद्वानों की राय:
मुख्यधारा के सुन्नी उलेमा ने ईसाल-ए-सवाब को अनुमेय कार्य के रूप में स्वीकार किया है। कुरान में अल्लाह ने मरियम की कहानी का उल्लेख करने का आदेश दिया है, जो साबित करता है कि अपने वली (ईश्वर के दोस्त) को याद रखना अल्लाह का आदेश है।
यह उत्सव सूफी समुदाय में एकता, प्रेम, और आध्यात्मिक ज्ञान को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।





