शहीद हसन नसरुल्लाह की शहादत के बाद से हिंदुस्तान के कुछ न्यूज़ चैनल उनको आतंकवादी कह रहे हैं जबकि इसका विरोध हमारे लखनऊ के कुछ मौलानाओं, और बुद्धिजीवी वर्ग खुलकर कर रहे हैं,
लेकिन ये इलेक्ट्रॉनिक न्यूज़ चैनल अभी भी उनको आतंकवादी साबित करने की कोशिश कर रहे है,जबकि हमारे देश की आतंकवादियों की सूची में शहीद हसन नसरुल्लाह का का नाम नहीं है, मै इन झूठे न्यूज़ चैनलों से पूछना चाहता हूं कि
क्या किसी देश के निहत्ती जनता पर बम,गोली से हत्या का विरोध करना आतंकवाद है,?
क्या किसी देश की जनता पर पानी,खाना बंद कर उनकी हत्या करना और उनका देश से भागने से रोकने का विरोध करना व उनकी तरफ आती हुई गोली बम के सामने अपने छाती को आगे कर देना आतंकवादी है,?
अब समय आ गया है इन चंद पैसों के लिए पत्रकारिता को बदनाम करने वालों के खिलाफ माननीय न्यायालय में दावा दायर करना चाहिए, ताकि दोषी न्यूज़ चैनलों पर सख्त कार्रवाई हो सके,
एक बात साफ हो गई है कि हमेशा से ही शिया समुदाय अधर्म के खिलाफ अपनी जान कुर्बान करता चला आया है और आज भी कर रहा है, हमारे वो दीनी भाई जो हर बात में फतवा देते हैं, आज ऐसी शहादतों पर अपने मुंह में दही जमाए बैठे हैं,ऐसे ही लोगों की नमाजे और रोज़े रब मुंह पर मार देगा, और रहेगा फला-फला सर ज़मीन पर जुल्म हो रहा था,, और तुम चुप थे, अब तुम अपने किए का मज़ा चखो,




