विश्वकर्मा पूजा हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जो विश्वकर्मा भगवान की पूजा के लिए मनाया जाता है। यह त्योहार हर साल 17 या 18 सितंबर को मनाया जाता है, जो कि भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की कृत्तिका नक्षत्र के दिन होता है।
विश्वकर्मा पूजा क्यों मनाई जाती है:
विश्वकर्मा भगवान को सृष्टि के रचयिता और सभी मशीनों और उपकरणों के निर्माता माना जाता है। वह भगवान ब्रह्मा के पुत्र हैं और उन्हें विश्व के सभी कलाओं और शिल्पों का स्वामी माना जाता है।
विश्वकर्मा पूजा के उपदेश:
1. काम की पवित्रता: विश्वकर्मा पूजा हमें काम की पवित्रता की शिक्षा देती है।
2. कला और शिल्प का सम्मान: विश्वकर्मा पूजा हमें कला और शिल्प का सम्मान करने की शिक्षा देती है।
3. सृजनात्मकता: विश्वकर्मा पूजा हमें सृजनात्मकता की शिक्षा देती है।
4. काम की निष्ठा: विश्वकर्मा पूजा हमें काम की निष्ठा की शिक्षा देती है।
5. भगवान की आराधना: विश्वकर्मा पूजा हमें भगवान की आराधना की शिक्षा देती है।
विश्वकर्मा पूजा की विधि:
1. विश्वकर्मा भगवान की मूर्ति या चित्र की स्थापना करें।
2. पूजा के लिए आवश्यक सामग्री जैसे कि फूल, फल, और हवन सामग्री इकट्ठा करें।
3. विश्वकर्मा भगवान की पूजा करें और उन्हें अर्पण करें।
4. हवन और आरती करें।
5. विश्वकर्मा भगवान की कथा सुनें और उनकी महिमा का गुणगान करें।



