अलम पाक 👈 ये परचम दुनिया के सबसे बेहतरीन सेनापति की याद मे उठाया जाता है जिन्हे दुनिया अलमदार अब्बास के नाम से जानती है,
मौला अब्बास ने 72 के हाथों 30 हज़ार की फौज के छक्के छुड़ा दिये थे,
और वो 72 भी ऐसे थे जिनमे बच्चे,बूढ़े,अधेड उम्र के और कुछ जवान भी थे, और ये 72 तीन दिन के भूखे प्यासे भी थे जिन पर यज़ीदियों ने पानी बंद कर दिया था,
इन 72 मे बोहोत कम ऐसे थे जिन्होंने कभी जंग मे हिस्सा लिया था वरना ज़्यादातर ऐसे थे जिन्हे जंग का कोई तजुर्बा ना था, जबकि इनके मुकाबले पे आने वाले तीस हज़ार के यज़ीदी लश्कर मे बेहतरीन जंगजु जवान थे जिन्हे कई जंगी लड़ाईयों का तजुर्बा था इसके बावजूद क़र्बला के मैदान मे तीन दिन के भूखे प्यासे 72 हुसैनियों ने हज़ारो के पसीने छुड़ा दिये थे और एक बेहतरीन जंग लड़कर शहीद हो गये, इमाम हुसैन ने अपने 70 असहाब का अलमबरदार अपने छोटे भाई हज़रत अब्बास को बनाया और अलम देते हुए कहा मेरे भाई मेरी इस छोटी सी फौज अलमदर आप हो,
नसरूम मिनल्लाहे वा फतहून करीब,
ये अलम जिसे इस्लाम का परचम भी कहा जाता है हर साल मौला अब्बास की याद मे उठाया जाता है,
हर साल मुहर्रम मे निकलने वाले हमारे गांव के तरीखी अलम कि ज़ियारत करें 👇





