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कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं को रोकना उनके अधिकारों का हनन

 

गांधी जी के तीन बंदर मशहूर हैं जो इस बात की तरफ इशारा करते हैं कि बुरा न बोलो, बुरा न देखो, बुरा न सुनो। लेकिन वर्तमान सरकार इससे भी आगे निकल गयी है। उसने तय कर लिया है कि कुछ भी न बोलना है, न सुनना है, न देखना है। बस जो दूसरा कोई बोले उसे चुप कराना है। ऐसा करना नपुंसकता की निशानी है। पूरे प्रदेश और देश का प्रशासन गुलाम हो चुका है। सरकार और प्रशासन दोनों निरंकुश हो चुके हैं।
उदाहरण है शाहजहांपुर से लखनऊ की पदयात्रा। सरकार की नपुंसकता का सबूत शाहजहांपुर का प्रशासन है जो बलात्कार पीड़िता को न्याय दिलाने की आवाज़ उठाने वाले कांग्रेसी नेताओं और कार्यकर्ताओं पर पाबंदी लगा चुका है। शाहजहांपुर प्रशासन किस अंदाज़ में योगी सरकार के इशारे पर कहर बरपा कर रही है.? कांग्रेस नेता जितिन प्रसाद को घर में नजरबंद कर दिया गया है।
देखिए, सोचिए, समझिए।
हम कहां पहुंच गए हैं?
क्या यह वही भारत है जिसे गाँधी, अंबेडकर, अबुल कलाम आजाद और बुद्ध के सपनों का देश कहा जाता है। क्या यह सही लोकतंत्र है जहाँ लोकतांत्रिक तरीके से आवाज़ उठाने पर पाबन्दी है.? क्या यह सारे जहां से अच्छा भारत है जहां बलात्कारी अस्पताल में और पीड़िता जेल में हैं। जहां बेटी बचाओ अभियान को बेटी गंवाओ में बदल दिया गया है। जहां दो पहिया वाहन चालकों को जुर्माना लगाया जाता है, केस कर दिया जाता है। रेपिस्ट को कुछ नहीं होता। क्या सरकार सिर्फ चालान कटवाने के लिए बनी है?
सरकार आखिर साबित क्या करना चाहती है । क्या गांधी, नेहरू, शास्त्री, इन्दिरा, राजीव, अंबेडकर, अटल, चरण सिंह, लोहिया, पटेल इत्यादि के त्याग और समर्पण का खून करना चाहती है।
आखिर मोदी-योगी सरकार को इस लोकतांत्रिक आवाज़ से डर क्यों है..?
याद रहे कि—-
संविधान की प्रस्तावना का निर्माण भारत को एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य करने के लिए किया गया।
जय हिन्द।

सैय्यद एम अली तक़वी
ब्यूरो चीफ- दि रिवोल्यूशन न्यूज
निदेशक- यूरिट एजुकेशन इंस्टीट्यूट
syedtaqvi12@gmail.com

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