10/06/2020
लखनऊ. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में काम कर रहे 89 शिक्षकों की नियुक्तियां निरस्त होंगी। इसके साथ ही अब तक वेतन के रूप में इनको किए गए भुगतान की वसूली भी होगी। दरअसल जांच के बाद इन शिक्षकों की नियुक्तियों में नियमों की अनदेखी किए जाने की पुष्टि हुई है। निदेशालय के निर्देश पर संयुक्त शिक्षा निदेशक सुरेन्द्र कुमार तिवारी ने इनकी नियुक्ति निरस्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी है। ये सभी शिक्षक सहायता प्राप्त बालिका विद्यालयों में पूर्व जिला विद्यालय निरीक्षक धीरेन्द्र नाथ सिंह के रहते तीन साल पहले नियुक्त हुए थे।
विद्यालयों में कार्यरत 89 शिक्षकों की बर्खास्तगी का प्रस्ताव जिला विद्यालय निरीक्षक (सेकेंड) नन्द कुमार से मांगा गया। साथ ही जांच में नियमों की अनदेखी कर अनियमितता बरतते हुए भी लोगों को नौकरी देने की पुष्टि हुई है। इसके अलावा कई विद्यालयों में शिक्षकों के पद मृत होने के बाद भी नियुक्तियां कर दी गईं। जिला विद्यालय निरीक्षक (फर्स्ट) डॉ. मुकेश कुमार सिंह से इन शिक्षकों और कर्मचारियों को वेतन के रूप में किए गए भुगतान पर रिपोर्ट मांगी गई है।
वहीं इस पूरे मामले की जांच अपर शिक्षा निदेशक के स्तर पर की गई। संयुक्त शिक्षा निदेशक सुरेन्द्र कुमार तिवारी के मुताबिक निदेशालय की ओर से इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम 1921 की धारा -16 ई(10) के तहत नियुक्तियों को निरस्त करने के आदेश दे दिए गए हैं। उसी के आधार पर डीआईओएस फर्स्ट और डीआईओएस सेकेंड से प्रस्ताव भी मांगा गया है।
इसके अलावा अभी तक इन शिक्षकों और कर्मचारियों को वेतन के रूप में करीब 13 करोड़ रुपये का भुगतान किए जाने का अनुमान जताया जा रहा है। डीआईओएस फर्स्ट के कार्यालय से बीते जनवरी महीने में इसका आंकलन करीब 11.25 करोड़ रुपये किया गया था। अब यह बढ़कर 13 करोड़ रुपये तक होने की उम्मीद जताई जा रही है।