संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरानी परमाणु कार्यक्रम और इस हिज़बुल्लह,हमास और फिलीस्तीन इस्लामी जिहाद के लिए ईरानी समर्थन के जवाब में ईरान के खिलाफ प्रतिबंध लगाया है,जिन्हें संयुक्त राज्य अमेरिका के द्वारा आतंकवादी संगठन माना जाता है, ग्रेफाइट एल्युमिनियम स्टील कोयला और औद्योगिक प्रक्रियाओं में इस्तेमाल होने वाले सॉफ्टवेयर पर रोक, ईरान सरकार को लोन देने पर रोक, ईरान के ऑटोमेटिव सेक्टर पर प्रतिबंध,इन सबके अलावा ईरानी क़ालीन तथा खाद्य पदार्थों का भी आयात बैंन है, जिसकी वजह से ईरान में 1, डॉलर की कीमत 42:262 ईरानी रियाल, इंडिया का ₹1 500 ईरानी रियाल पहुंच गई है,आर्थिक मंदी से ईरानी आवाम बेरोजगारी स्वास्थ्य एवं आदि जरूरत की चीजों से जूझ रही है,हाल ही में अर्थव्यवस्था से परेशान ईरान के युवाओं ने बेरोजगारी के खिलाफ ईरानी सड़कों पर जबरदस्त विरोध किया, इस प्रदर्शन को रोकने के लिए क़ौम के लीडरों ने आकर अवाम को समझाया, इसके बाद विरोध खत्म हुआ, अब ईरान की सरकार ने अर्थव्यवस्था से सुधारने निपटने के लिए रूस और भारत सहित 33 देश के नागरिकों के लिए फ्री वीजा पॉलिसी लागू की है,जिससे उनके देश में टूरिज्म बढ़ेगा, साथ ही साथ व्यवसाय के लिए इंटरनेशनल हब बनने की उम्मीद है, क्योंकि ईरान ने प्रतिबंध झेलते हुए भी टेक्नोलॉजी,साइंस,खाद्य पदार्थ, अनेक आधुनिक करण पर जबरदस्त काम किया है,जिसको इन 33 देश में व्यापार बढ़ेगा विशेषज्ञों और बुद्धिजीवियों की माने तो ईरान का यह कदम सराहनीय है
लखनऊ के वह मौलाना जो मेंबर से बैठकर खाली तकरीर करते हैं और जमीनी हकीकत पर कुछ नहीं करते और ईरानी विजा पॉलिसी का सेहरा अपने सर बंधवाना चाहते हैं वह बताएं कि आपने केवल लखनऊ के उन दर्दों कुटीर उद्योग का व्यापार बंद होने के बाद आपने उनके रोजगार के लिए क्या किया और पढ़े-लिखी उन बेरोजगार बच्चों के भविष्य के बारे में क्या कार्य किया है और कर रहे हैं सोशल मीडिया का जमाना है हालत किसी से छुपी नहीं है क्या आप क़ौम और मिल्लत के लिए सच्चर कमेटी लागू करने के लिए राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री पर दबाव बना सकते हैं
ईरान ने आर्थिक मंदी से निपटने के लिए 33 देश की वीजा पॉलिसी की खत्म :कम्बर रज़ा मिंटू





