धर्मेन्द्र जी का मासूमीयत से भरा चेहरा बॉलीवुड में हमेशा उनका कवच बनकर रह..कोई उनसे कितना भी नाराज़ क्यों ना हो.. लोग उनसे और उनके मासूम चेहरे को बुरा भला नहीं कह पाते थे.. एक किस्सा सुनाता हूं…
दरअसल ऋषिकेश मुखर्जी की फ़िल्म “चुपके चुपके” उत्तम कुमार की एक बंगाली फ़िल्म की रीमेक है। ऋषिकेश मुखर्जी ने पहले इस फ़िल्म को धर्मेन्द्र और आशा पारेख को साथ लेकर बनाने का निर्णय लिया था, ये फ़िल्म बनाने से पहले उनके ज़हन में आशा पारेख और धर्मेन्द्र ही थे…औऱ उन दोनों से ऋषि दा ने बात भी कर ली थी …लेकिन शूटिंग शुरू होने से पहले, धर्मेन्द्र के कहने पर ऋषि दा ने आशा पारेख की जगह शर्मिला टैगोर को रिप्लेस कर दिया था। लेकिन जब आशा पारेख को पता चला के उसकी जगह शर्मिला को ले लिया गया है तथा वो फ़िल्म में है ही नहीं.. तो वो ऋषिकेश मुखर्जी पर बहुत भड़की थी.. लेकिन आश्चर्य की बात ये थी के ..आशा ने धर्मेन्द्र को इस बारे में कुछ भी नहीं कहा, मतलब उन से बिल्कुल नाराज़ नहीं हुई.. बल्कि उसके बाद भी वो धर्मेन्द्र से लगातार फिल्में करती रही।
दरअसल धर्मेन्द्र किसी को मना नहीं कर पाते थे, और उनदिनों शर्मिला को किसी अच्छी पिक्चर की ज़रूरत थी क्योंके उनके करियर में थोड़ा ठहराव आ गया था तो शर्मिला ने धर्मेन्द्र को बड़े प्यार से इस फ़िल्म में काम करने की दरख्वास्त की.. जिसे धर्म जी उस हसीना को जवाब नहीं दे सके हालांके आशा पारेख के साथ उनके संबंध शर्मिला से भी ज्यादा अच्छे थे।लेकिन धर्मेन्द्र की रजामंदी से चुपकेचुपके फ़िल्म शर्मिला टैगोर की झोली में चली गयी। आशा पारेख ऋषिकेश मुखर्जी पर तो भड़की लेकिन धर्मेन्द्र पर नहीं, क्योंके वो जाती तोर पर धर्मेन्द्र को अच्छी तरह से जानती थी।
सीनियर फिल्म अभिनेता धर्मेंद्र का मासूम चेहरा



