बेली स्कूल बिहार के पटना ज़िला के बाढ़ क़स्बे के सबसे पुराने स्कूल में से है, जिसकी बुनियाद सैयद नूरूल होदा ने 1887 में डाली थी। तब ये स्कूल पुराने बाढ़ बाज़ार के पास थाने के ठीक सामने हुआ करता था, जहां हाल तक दून अकेडमी चलता था।
एक रिपोर्ट के अनुसार नवाब कोठी निवासी नवाब अमीर अली ख़ान बहादुर ने 1869 में एक फ़ंड बना कर क़रीब 685 रुपय उस समय बाढ़ के SDO Gordon को दिया था। जिसे सैयद नूरूल होदा ने 1887 में उस समय अमली जामा पहनाया, जब वो बाढ़ के SDO बने। इस फ़ंड के लिए नवाब अमीर अली ने लोकल ज़मींदारों से भी चंदा लिया था।
बाद में इस स्कूल की नई इमारत 1926 में नेशनल हाईवे के सामने कई एकड़ ज़मीन में बन कर तैयार हुई, जिसकी संग ए बुनियाद सैयद नज़ीरउद्दीन साहब ने डाला था। जो उस समय बाढ़ के SDO हुआ करते थे। स्कूल के बाद इलाक़े में कॉलेज की ज़रूरत भी हुई। तब इसी स्कूल की ज़मीन पर एक कॉलेज की बुनियाद डाली गई, बाद में यही कॉलेज अनुग्रह नारायण सिंह कॉलेज के नाम से जाना गया। इस कॉलेज की बुनियाद डालने में सैयद वसी अहमद, सूरज प्रसाद सिंह, अलख देव सिंह, सुशील जायसवाल, सैयद नेहाल अहसान आदि का अहम रोल था। आज़ादी से पहले बिहार शरीफ़ और उसके आस पास के गाँव के लोग बड़ी संख्या में बाढ़ में आकार पढ़ाई किया करते थे।
फ़ोटो में आप नवाब अमीर अली ख़ान बहादुर को देख सकते हैं, जो नज़रबंदी के दौरान नवाब वाजिद अली शाह के दीवान थे। बेली नाम बंगाल के 1887 से 1890 तक गवर्नर Sir Steuart Colvin Bayley के नाम पर है, उस समय बिहार भी बंगाल का हिस्सा था





