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भाजपा सरकार किसानों के उत्पीड़न के सारे रिकार्ड तोड़ रही है।

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समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने कहा है कि भाजपा सरकार किसानों के उत्पीड़न के सारे रिकार्ड तोड़ रही है। पूंजीघरानों और मिल मालिकों के कहने पर किसानों का शोषण हो रहा है। अपनी आवाज उठाने पर किसानों पर यह सरकार लाठियां बरसाती है। किसान सम्मान निधि का लालच दिखाकर अब किसानों से जबरन वसूली की जा रही है। किसानों के खेत और जमीन का अधिग्रहण कर सरकार उन्हें बेदखल तो कर रही है पर उन्हें उचित मुआवजा भी नहीं दिया जा रहा है।
भाजपा सरकार ने अपनी वाहवाही के लिए किसानों से धान खरीद का ऐलान तो कर दिया पर अभी तक क्रय केंद्रों की व्यवस्था भी नहीं हो पाई है। कई जगहों पर तो क्रय केन्द्रों पर ताला लगा है और कहीं-कहीं किसानों को यों ही टरका दिया गया?
धान खरीद में भ्रष्टाचार की शिकायतें शुरुआत में ही आने लगी है। सीतापुर में क्रय केन्द्रों पर हो रही धान की फर्जी खरीद, बिना तौले खरीद दिखा रहे जिम्मेदार। भाजपा सरकार में बढ़ रहे भ्रष्टाचार के कारण हो रहा अन्नदाताओं का शोषण शर्मनाक है।
दादरी एनटीपीसी प्लांट पर शांतिपूर्वक धरना दे रहे किसानों पर पुलिस ने निर्मम लाठीचार्ज किया। महिलाओं को बुरी तरह पीटा गया और दर्जनों किसानों को गिरफ्तार किया गया। अन्नदाताओं पर लाठीचार्ज करना, धरना प्रदर्शन रोकना तथा उन्हें जेल भेजना लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला है। लाठी के सहारे किसानों की आवाज को दबाना घोर निंदनीय है।
एमएसपी पर फसल खरीद का सपना देखते किसानों को वर्षों बीत गए है। भाजपा ने उन्हें सन् 2022 तक आय दुगनी करने का भी झांसा दिया। गन्ना किसानों को ब्याज सहित बकाया भुगतान नहीं हो रहा है।
प्रदेश में मुख्यमंत्री जी को नए-नए निर्देश देने का शौक है तो अधिकारियों को उससे बेपरवाह रहने का शौक है। किसान सरकार अव्यवस्था के चलते परेशान है। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया समय से पूरी न होने के चलते किसान धान क्रय केन्द्रों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। तहसील में लेखपाल किसानों के डाक्यूमेंट्स समय से सत्यापित नहीं कर रहे हैं। प्रशासन की सुस्ती किसानों पर भारी पड़ रही है।
दरअसल, भाजपा किसानों की नहीं बड़ी कम्पनियों का हित साधती है। सरकारी क्रयकेन्द्रों की अव्यवस्थाओं के चलते कई कम्पनियां औने पौने दाम पर धान की खरीद करने में लग जाएगी। गेहूं खरीद में यह सब सामने आ चुका है। बड़ी कम्पनियों की सरकार से मिली भगत के चलते प्रदेश का किसान-परेशान हाल है। उसके हिस्से में कर्ज और अपमान ही आ रहा है। पूंजीपतिपरस्त भाजपा सरकार से किसानों के हितों के संरक्षण की उम्मीद कैसे की जा सकती है?

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